उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (पीएमएलए) के तहत कुर्क की गई संपत्ति को अपराध की आय नहीं माना जा सकता है। साथ ही, आपराधिक गतिविधि से प्राप्त संपत्ति के रूप में नहीं देखा जा सकता है, जब अनुसूचित या पूर्वानुमानित अपराध को सक्षम अदालत की ओर से रद्द कर दिया गया हो।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ईडी के वकील के इस तर्क में भी कोई दम नहीं है कि बरी करने के आदेश के खिलाफ दायर अपील ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही की निरंतरता है, क्योंकि यह सामान्य कानून है कि आपराधिक कार्यवाही के संदर्भ में मुकदमा तभी समाप्त होता है। जब उसका परिणाम बरी हो जाता है, हालांकि दोषसिद्धि के मामले में सजा के साथ दोषी अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा समाप्त हो जाता है।
न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर एक मामले में कुछ आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए ये टिप्पणी की।