दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईपीएल में क्रिकेट खिलाड़ियों की नीलामी और बिक्री को चुनौती देने वाली याचिका को शुक्रवार को खारीज कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए कहा कि उसने सिर्फ प्रचार पाने के लिये यह याचिका दायर की है।
अदालत ने कहा कि यहां मानव की खरीद-फरोख्त का कोई सवाल नहीं उठता और यह एक जनहित याचिका नहीं है बल्कि यह प्रचार पाने वाली याचिका है। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति हरि शंकर की एक पीठ ने कहा कि याचिका में बिक्री या नीलामी को लेकर लगाये गये आरोप राष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए अपमानजनक हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर शर्मा ने इंडियन प्रीमियर लीग में खिलाड़ियों की नीलामी को चुनौती देते हुए इसे रोकने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। उस समय मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन ने इसकी सुनवाई के लिए 26 जुलाई की तारीख दी थी।
अपनी याचिका में सुधीर ने कहा था कि आईपाएल में खिलाड़ियों की बोली लगाना संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में उन्होंने सरकार से 'अंतर्राष्ट्रीय मानव नीलामी' से संबंधित मामले को देखने के लिए निर्देश देने की मांग की थी।
उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि सरकार नीलामी के माध्यम से मानव बोली लगाने और बेचने के खतरे को नियंत्रित करने और उसपर प्रतिबंध लगाने में विफल रही है। याचिका में दोषी व्यक्तियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई के निर्देश देने की भी मांग की गई थी।