हाई कोर्ट ने आईआईएस के एक संदिग्ध ऑपरेटर की याचिका को खारिज कर दिया है। उसने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों का निरीक्षण करने की मंजूरी मांगी थी। यह दस्तावेज आतंकवादी समूह में शामिल होने के लिए लोगों की भर्ती और लोगों को वित्तीय सहायता से संबंधित है।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला इस्लामी राज्य इराक और सीरिया (आईएसआईएस) से जुड़े बड़े षड्यंत्र से संबंधित है और मामले में जांच चल रही है। वहीं आरोपपत्र पहले ही दायर किया जा चुका है। एनआईए द्वारा रखे गए तथ्य व साक्ष्य दायर अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा हैं।
बता दें कि यह याचिका दिल्ली निवासी आरोपी मुफ्ती अब्दुस सामी कस्मी ने दायर की थी। उन्होंने एनआईए की विशेष अदालत के दिसम्बर 2016 को दिए उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें एनआईए द्वारा सीलबंद रिपोर्ट व दस्तावेजों को प्रदान करने से इंकार कर दिया था।
गौरतलब है कि 5 फरवरी 2016 को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से मामले में काश्मी को गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने दावा किया कि वह उत्तेजक और भड़काऊ भाषण दे रहे थे और युवाओं को राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे।