हाईकोर्ट ने शुक्रवार को चीनी मांझे पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर कोई निर्देश देने से इनकार कर दिया। दरअसल इस मुद्दे पर हाईकोर्ट एक अन्य जनहित याचिका पर पहले ही निर्देश जारी कर चुकी है। ताजा याचिका में पतंग उड़ाने का समय और उसके लिए एक स्थान निर्धारित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने कहा कि यह याचिका जनहित याचिका की प्रकृति की है। इस पर दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट पहले ही निर्देश जारी कर चुकी है। हाईकोर्ट ने यह जानकारी सामने आने के बाद कहा कि आगे कोई आदेश अब जारी करने की जरूरत नहीं है। पेश याचिका दिल्ली निवासी मोहित घाल्यान की ओर दाखिल की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि पेशे से इंजीनियर मोहित 15 अगस्त 2012 को चीनी मांझे से घायल हो गए थे और उनकी गर्दन पर चोटें आई थीं। उनकी तरफ से पतंग उड़ाने और चीनी मांझे पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिशा निर्देशों के प्रकाशन के लिए दिल्ली सरकार और पुलिस आयुक्त को निर्देश देने की मांग की गई।
याचिका में कहा गया कि हालांकि दिल्ली सरकार ने पहले ही धातु या कांच से बने मांझे के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन जितनी घटनाएं सामने आ रही है वह बताती हैं कि यह प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित है।