नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के एक एलएलबी छात्र के खिलाफ परीक्षा में अनुचित साधन अपनाने के आरोप में लगाई गई सजा को कम कर दिया है। अदालत ने कहा कि पूरे सेमेस्टर के सभी पेपर रद्द करने की सजा आनुपातिक नहीं थी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा, मेरी राय में पूरे सेमेस्टर के पेपर रद्द करना आनुपातिक नहीं है, क्योंकि संभावनाओं के आधार पर भी यह साबित नहीं हुआ कि याचिकाकर्ता को पेपर में नकल या धोखाधड़ी के लिए सामग्री का इस्तेमाल करते हुए पाया गया। छात्र 13 जनवरी 2025 को भारतीय न्याय संहिता के पेपर की परीक्षा दे रहा था। वह वॉशरूम गया। एक फैकल्टी सदस्य उसके पीछे गए और कथित तौर पर यूरिनल पर स्लिप से नकल करते हुए पकड़ा। इसके बाद शो कॉज नोटिस जारी किया गया और विश्वविद्यालय की परीक्षा अनुशासन समिति ने जांच शुरू की। समिति ने पहले अगले सेमेस्टर के अंत तक सभी परीक्षाओं से प्रतिबंधित करने का आदेश दिया। अपील पर इसे कम कर सेमेस्टर के सभी पेपर रद्द करने की सजा दी गई। छात्र ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। विश्वविद्यालय ने उस पेपर को छोड़कर बाकी विषयों के नतीजे जारी कर दिए थे।
अदालत ने पाया कि जांच रिपोर्ट में फैकल्टी सदस्य का कोई बयान नहीं है कि छात्र को सामग्री का इस्तेमाल करते हुए देखा गया। अदालत ने कहा कि ऐसी जांच में संभावनाओं के आधार पर फैसला होता है, लेकिन यहां सामग्री का वास्तविक इस्तेमाल भी साबित नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में केवल वॉशरूम में सामग्री मिलने का उल्लेख है, इसलिए छात्र को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने मामले को कम सजा वाले प्रावधान के तहत माना, जिसमें केवल संबंधित पेपर रद्द होगा और उसमें शून्य अंक माने जाएंगे।