खंडपीठ ने एनबीसीसी को निर्देश दिया कि 2 जुलाई तक कोई पेड़ न काटा जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता डॉ. कौशलकांत मिश्रा को इस दिन एनजीटी के समक्ष पेश होने के लिए कहा है।
खंडपीठ के समक्ष एनबीसीसी ने कहा कि पर्यावरण एनओसी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई का अधिकार केवल एनजीटी को है। पेड़ों की कटाई की अनुमति के एवज में 8 करोड़ रुपये वृक्ष प्राधिकरण में जमा कराए जा चुके हैं।
दूसरी ओर, पेड़ काटने की अनुमति को सही बताते हुए केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता रिपुदमन भारद्वाज ने कहा कि पेड़ों की कटाई के लिए पर्यावरण एनओसी एनजीटी के पिछले आदेशों पर विचार के बाद ही दी है।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क रखा कि दिल्ली सरकार के वृक्ष प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने की अनुमति नवंबर 2017 में दी थी। अब इस फैसले को एनजीटी में चुनौती नहीं दी जा सकती।
दिल्ली में सत्तारूढ़ आप ने पेड़ काटने पर हाईकोर्ट की पाबंदी का स्वागत करते हुए कहा कि पेड़ों को काटने के संबंध में दिल्ली सरकार से दी गई सभी अनुमतियों पर पुनर्विचार होगा। सरकार की कोशिश पूर्व में दिए सभी आदेश रद्द करने की होगी।
पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुये आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट से गुजारिश की थी कि इस केस में सरकार को भी पार्टी बनाया जाए। अदालत ने यह गुजारिश स्वीकार कर ली है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 1123 पेड़ काटने की मंजूरी 2014 की है। नेताजी नगर में 2294, नारौजी नगर में 1454 व मोहम्मदपुर में 363 पेड़ काटने की इजाजत है। यह परमिशन दिल्ली सरकार के पर्यावरण व वन विभाग ने दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट 1994 के सेक्शन 29 के तहत केंद्र शासित उपराज्यपाल की तरफ से दी है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि एबीसीसी अध्यक्ष और केंद्र सरकार इस मामले में झूठ बोल रहे हैं। इन सब संख्याओं के अलावा 11 हजार पेड़ काटने का प्रस्ताव अलग से था, लेकिन दिल्ली सरकार के वन विभाग के दखल के बाद उसे रोक दिया गया।
दिलचस्प यह है कि एनबीसी ने दोबारा 606 पेड़ काटने का प्रस्ताव बनाया। इसे भी दिल्ली सरकार ने मंजूर नहीं किया है। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, जितने बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटने की इजाजत दी गई है, वह दिल्लीवालों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, आप व दिल्ली सरकार दिल्लीवालों के हक में प्रोजेक्ट का विरोध करती है। कोर्ट से लेकर सड़कों तक पेड़ों को बचाने की मुहिम जारी रहेगी। दिल्ली सरकार पेड़ों को काटने के संबंध में दी गई सभी अनुमतियों पर पुनर्विचार करेगी।