कोर्ट में सरकार ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान, सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा नीट के दोबारा आयोजन से पहले 'अराजकता' से बचने के लिए यह अकाउंट ब्लॉक किया गया था। सरकार का तर्क था कि ऐसे अकाउंट से गलत सूचना फैल सकती है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा- केंद्र की चिंता अब प्रासंगिक नहीं
उच्च न्यायालय ने सरकार के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि NEET को लेकर केंद्र की चिंता अब प्रासंगिक नहीं है। इसका मतलब है कि परीक्षा से संबंधित संभावित गड़बड़ी का खतरा अब समाप्त हो गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध तभी लगाया जा सकता है, जब कोई ठोस और तात्कालिक खतरा हो। इस मामले में ऐसा कोई खतरा मौजूद नहीं था।
जानें कोर्ट ने क्या कहा
यह फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को मजबूत करता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को नागरिकों के ऑनलाइन विचारों को दबाने के लिए अत्यधिक शक्ति का उपयोग नहीं करना चाहिए। 'कॉकरोच जनता पार्टी' एक व्यंग्यात्मक मुहिम है, जो अक्सर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करती है। अदालत का यह आदेश दर्शाता है कि व्यंग्य और आलोचना को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में माना जाना चाहिए।