हाईकोर्ट ने बाल सुधार गृहों में बंद किशोरों की सुरक्षा के लिए वहां नियमित रूप से निरीक्षण करने का निर्देश दिल्ली सरकार को दिया है। न्यायाधीश रवींद्र भट व न्यायाधीश आरवी ईसवर की खंडपीठ ने कहा कि बाल सुधार गृहों में सभी मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
जांच के दौरान कोई भी प्रतिबंधित वस्तु मिलने पर उसे जब्त किया जाए और ऐसी वस्तुओं की सूची बनाई जाए। साथ ही सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के बजाय पूर्व सैनिकों को दी जाए। बाल सुधार गृह में बंद किशोरों ने गत साल अगस्त से दिसंबर के बीच चार बार बवाल किया था। बाल सुधार गृह में आग लगाने के बाद कई किशोर फरार हो गए थे। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में स्वत: संज्ञान लिया था।
खंडपीठ ने कहा कि अगर बाल सुधार गृह या किसी किशोर के पास हथियार या नशीला पदार्थ मिलता है तो प्रभारी अधिकारी इसकी जांच करेगा। किशोर के पास यह सामान कैसे पहुंचा, इसके जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा। पीठ ने इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर समाज कल्याण विभाग व जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को देने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि बाल एवं महिला विकास विभाग आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। अगर आरोपी शख्स कोई अधिकारी है तो विभाग इसकी रिपोर्ट बोर्ड को भेजेगा। दिल्ली सरकार की अधिवक्ता जुबेदा बेगम ने कोर्ट को बताया कि विभाग में 74 पद खाली हैं।
इनमें से 40 कल्याण अधिकारियों के पदों को भरने के लिए दिल्ली अधीनस्थ कर्मचारी चयन बोर्ड ने विज्ञापन जारी किया है। कोर्ट ने इस संबंध में बोर्ड से बातचीत करने व शेष पदों को भरने के लिए चार सप्ताह के भीतर विज्ञापन देने और भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया।