हाईकोर्ट ने प्रेशर हॉर्न व बुलेट बाइक में लगने वाले मोडीफाइड साइलेंसर पर रोक के मामले में केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ ही सरकारी एजेंसियों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। डीयू के छात्र व एक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर कर राजधानी में प्रेशर हॉर्न व मोडीफाइड साइलेंसर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे को उठाया है।
एनजीओ जस्टिस फोर राइट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष सत्यम सिंह व डूसू छात्र प्रतीक शर्मा ने यह याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि डूसू चुनाव के दिनों में इस तरह के हॉर्न लगे वाहनों और मोडीफाइड साइलेंसर युक्त बाइकों की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट 2005 में फैसला सुना चुकी है। इस पर याची के वकील हरदीप सिंह होरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल राय जाहिर की थी, कोई निर्देश नहीं दिया था, इसलिए यह पुलिस व सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है। राजधानी में यह प्रेशर हॉर्न बाजार में बिना रोक टोक बेचे जा रहे हैं। इससे बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के मद्देनजर अब इस मुद्दे पर नीति बनाने के लिए हाईकोर्ट के दखल की जरूरत है।