दिल्ली विश्वविद्यालय के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। छात्रों की ओर से दायर की गई याचिका में इसी महीने होने वाले इवेन सेमेस्टर के लिए ऑफलाइन परीक्षा के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने शुक्रवार को कहा कि यह किसी भी आदेश को पारित करने का सही समय नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को परिस्थितियों में कोई बदलाव होने पर फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी है। याचिका में वर्तमान सेमेस्टर के लिए सभी परीक्षाओं को ओपन बुक मोड में आयोजित करने का निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।
छात्रों ने बताया कि 9 फरवरी के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ताओं और विभिन्न कॉलेजों के अन्य छात्रों की कक्षाएं ऑनलाइन मोड के माध्यम से संचालित की जाती रहीं। इसके लिए उन्हें समय-समय पर संबंधित पर लिंक प्रदान किए गए। अधिवक्ता अजय कुमार श्रीवास्तव के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि वर्तमान स्थिति में जहां कोरोनोवायरस तेजी से फैल रहा है और दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं, ऐसे में विश्वविद्यालय को अपने नोटिस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
याचिका में आगे कहा गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 65 प्रतिशत से अधिक बाहरी छात्र हैं। उनके पास कॉलेजों की यात्रा करने के लिए स्वयं के वाहन नहीं हैं। मौजूदा स्थिति में परीक्षा में बैठने के लिए सार्वजनिक वाहन का उपयोग करना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।