दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो उस जनहित याचिका को रिपोर्ट के तौर पर देखें जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के सभी कंटेनमेंट जोन में मुफ्त मास्क, दिन में दो बार मुफ्त खाना और पानी देने की मांग की गई है।
दिल्ली में 200 से ज्यादा कंटेनमेंट जोन हैं। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने ऐसे क्षेत्रों में तकनीकी या अन्य सेवाकर्मियों को प्रवेश या आवश्यक वस्तुओं की घर पर आपूर्ति करने की इजाजत देने समेत विभिन्न राहतों के लिये अधिकारियों के समक्ष कोई प्रतिवेदन नहीं दिया था।
अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा इस याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर देखा जाए और कानून, नियमों और मौजूदा मामले में तथ्यों के हिसाब से लागू होने वाली सरकारी नीतियों के मुताबिक इस पर फैसला किया जाए। इस निर्देश के साथ ही अदालत ने याचिका को निस्तारित मान लिया।
रजनीश भास्कर द्वारा दायर याचिका में ऐसे इलाकों में सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सभी लोगों के तापमान की जांच की भी मांग की गई थी।