अदालत ने 2017 में गठित की थी समिति
उच्च न्यायालय की ओर से 2017 में कमेटी गठित की गई थी। इसमें कहा गया था कि संरचनाओं के सर्वेक्षण के जरिये यह 1993 में अस्तित्व में मौजूद संरचनाओं की संख्या बताने को कहा गया था। समिति में डीडीए के उपाध्यक्ष, एसडीएमसी के आयुक्त, एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी या समकक्ष शामिल हैं। एएसआई के महानिदेशक, दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त और राजस्व सचिव के साथ-साथ आईएनटीएसीएच (इनटैक) के एक प्रतिनिधि को एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक को शामिल करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने पहले क्षेत्र में सभी भूमि लेनदेन और निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।
शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को दिया था निगरानी का निर्देश
एतिहासिक किले की रक्षा, रखरखाव और संरक्षण के लिए 2001 की एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय को निगरानी रखने का निर्देश दिया था। अदालत ने पहले यह भी कहा था कि तुगलक वंश के संस्थापक ग्यासुद्दीन तुगलक की ओर से 1321 ईस्वी में बनाए गए किले की सुरक्षा के लिए शीर्ष अदालत के निर्देश का उल्लंघन किया किया। शीर्ष अदालत ने फरवरी 2016 में पूरे तुगलकाबाद किले को संरक्षित घोषित करते हुए एएसआई को निर्देश दिया था कि वह वहां किसी भी तरह की जमीन पर कब्जा या अतिक्रमण ना करने दें।