कोर्ट ने शाहरुख पठान की याचिका पर संज्ञान लेने के साथ ही गौर किया कि उसके पिता पर भी मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में सजा दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की ओर से दी गई दलीलें राहत देने के लिए नाकाफी हैं। सीएए के विरोध में हुए दंगे में हथियार के साथ शामिल होना साधारण अपराध नहीं है।
वहीं शाहरुख के वकील सुनील मेहता ने दलील दी कि दंगे के दौरान उनका मुवक्किल घटनास्थल से गुजर रहा था, उसी दौरान हुई पत्थरबाजी के दौरान वह एक शेल्टर के नीचे जाकर छिपने लगा, लेकिन वहां उसे जगह नहीं मिली। इसी दौरान भीड़ में से ही किसी अज्ञात शख्स ने उसे पिस्तौल थमा दी, जिसका प्रयोग शाहरुख ने अपनी सुरक्षा के लिए किया।
वहीं विशेष लोक अभियोजक देवेन्द्र कुमार भाटिया ने आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका का यह करते हुए विरोध किया कि वह फिर से फरार हो सकता है और अगर वह फरार हुआ तो मामले की जांच प्रभावित हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि 24 फरवरी को मौजपुर-जाफराबाद इलाके में सीएए के विरोध में हुए दंगे में शाहरुख पठान ने खुलेआम पुलिस हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर पिस्तौल तान दी थी। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं।