हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दुष्कर्म के कानून में संशोधन के दुरुपयोग का हवाला देते हुए खारिज करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2013 व 2018 में दुष्कर्म संबंधी कानून में संशोधन का बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने मुध पूर्णिमा किश्वर की याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची दुष्कर्म कानून का दुरुपयोग रुकवाने के लिए आदेश जारी करवाना चाहती है लेकिन कोर्ट ऐसा आदेश जारी नहीं कर सकती जिसका वह पालन नहीं करवा सकती।
सामाजिक कार्यकर्ता किश्वर ने याचिका दायर कर 2013 व 2018 में दुष्कर्म संबंधी कानून में हुए संशोधनों को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी और उन्हें रद्द करने की मांग की थी। याचिका का कहना था कि इन संशोधनों के बाद दुष्कर्म संबंधी कानूनों का व्यापक स्तर पर महिलाओं द्वारा दुरुपयोग हो रहा है।
दुष्कर्म के आरोपों की पुष्टि के लिए मेडिकल साक्ष्यों की भी जरूरत नहीं है और केवल कथित पीडित महिला का बयान ही काफी है। इन संशोधनों के बाद दुष्कर्म के मामलों में सजा को सात साल से बढ़ाकर दस साल तथा मृत्यु दंड तक का प्रावधान कर दिया गया है। इसके अलावा शारीरिक संबंधों के लिए पीड़िता की सहमति के लिए आयु को 16 साल से बढ़ाकर 18 साल कर दिया गया है।