कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ताओं के बालिग होने के तथ्य के बारे में कोई संदेह नहीं है। यहां तक कि परिवार के सदस्य भी ऐसे संबंध या याचिकाकर्ताओं के बीच वैवाहिक संबंधों पर आपत्ति नहीं कर सकते। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध अप्रैल में शादी की थी और परिवार के सदस्यों, विशेषकर महिला की मां की धमकियों के बीच तब से खुशी-खुशी साथ रह रहे है।
अदालत ने राज्य को दोनों याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देेते हुए यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि उनमें से किसी को भी विशेषकर महिला के माता-पिता या परिवार के सदस्यों को कोई नुकसान न पहुंचे। अदालत ने संबंधित बीट अधिकारी को समय-समय पर उनकी जांच करने के लिए कहा है। अदालत ने कहा याचिकाकर्ता आईओ को अपने वर्तमान आवासीय पते के साथ-साथ कामकाजी पते का भी खुलासा करे, जो किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को इसका खुलासा नहीं करेगा।