नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2003 के पुराने मामले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के दो इंजीनियरों को मुख्य अभियंता पर कथित हमले के आरोप से बरी रखने वाले निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा।
मामला 2003 का है, जब मुख्य अभियंता ने आरोप लगाया था कि दो अधीनस्थ इंजीनियरों ने उनके साथ मारपीट की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता मुख्य अभियंता की गवाही अकेली थी और उसमें कोई अन्य गवाह या स्वतंत्र पुष्टिकरण नहीं था। अभियुक्तों की पहचान भी संदेह से परे साबित नहीं हो सकी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला केवल एक गवाह की गवाही पर टिका हो, तो उसे अन्य विश्वसनीय साक्ष्यों से समर्थन मिलना जरूरी है।