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कोरोना काल में रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में आयुष पद्धतियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिकाः डॉक्टर सत्येंद्र जैन

Fri, 05 Mar 2021 06:45 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली सरकार ने आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष कदम उठाया,
  • कड़ा नियमन बना कर इस क्षेत्र में अवैध सेवाओं को रोकना भी सरकार की प्राथमिकता
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर सत्येंद्र जैन के साथ एक्जामिनिंग बॉडी फॉर पैरामेडिकल ट्रेनिंग फॉर भारतीय चिकित्सा डॉक्टर प्रदीप अग्रवाल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर सत्येंद्र जैन ने कहा है कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में भी गंभीर बीमारियों के उपचार की प्रचुर क्षमता है और इन क्षमताओं को उभारने की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक पद्धतियों का सबसे बड़ा लाभ यही है कि ये दीर्घकालिक असर डालती हैं और रोगी के शरीर ही नहीं, मन को भी लंबे समय के लिए मजबूत बनाती हैं।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोरोना काल में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का महत्व एक बार पुनः स्थापित हुआ और इसके माध्यम से करोना के माइल्ड स्तर के हजारों मरीजों का सफल उपचार किया गया। इसके माध्यम से लोगों के शरीर का प्रतिरक्षातंत्र मजबूत बनाने में बड़ी मदद मिली। उन्होंने कहा कि सरकार आयुष सेवाओं को और अधिक लोकप्रिय और जनोपयोगी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारतीय चिकित्सा हेतु परा चिकित्सा प्रशिक्षण परीक्षा निकाय के नवनिर्मित कार्यालय का उद्घाटन करते हुए सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार हर दिल्लीवासी के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए अनेक योजनाओं के माध्यम से लगातार प्रयास कर रही है। इसमें भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को भी उचित महत्त्व और स्थान दिया जाएगा।
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एक्जामिनिंग बॉडी फॉर पैरामेडिकल ट्रेनिंग फॉर भारतीय चिकित्सा के चेयरमैन डॉक्टर प्रदीप अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि इस विभाग का गठन 04 मार्च 2011 को किया गया था। तभी से दिल्ली सरकार का आयुष विभाग लोगों की भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से सेवा कर रहा है।

को़रोना काल में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का महत्व एक बार पुनः स्थापित हुआ और लोगों को यह बात समझ में आई कि हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज करने में न केवल सक्षम हैं, बल्कि ये व्यक्ति तक रोगों को आने से ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डॉक्टर प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली के तिब्बिया कॉलेज और स्वामी ब्रह्मप्रकाश अस्पताल में कोरोना के माइल्ड और लक्षणहीन रोगियों का इलाज किया गया था। इसके माध्यम से दिल्ली के हजारों मरीजों को स्वास्थ्य लाभ करने में मदद मिली थी। आज भी कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और इसके संक्रमण में आने से बचने के लिए लोगों को अभी भी काढ़े और गोल्डन मिल्क को लेना जारी रखना चाहिए।

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