पीठ ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एक बड़े पेड़ की बराबरी 10 पौधे कैसे कर सकते हैं? एक नन्हे पौधे को बड़ा होकर पेड़ बनने में कितना वक्त लगेगा? पीठ ने कहा कि दिल्ली पहले अपने पक्षियों की आबादी को लेकर जानी जाती थी, लेकिन आज स्थिति भिन्न हो गई है। पीठ ने कहा कि इस तरह की आठ मंजिला इमारतों के लिए आप पानी कहां से प्राप्त करेंगे? इन इमारतों से कितनी मात्रा में कूड़ा निकलेगा? यहां पार्किंग की व्यवस्था कहां है और वायु प्रदूषण के बारे में क्या सोचा गया है? आप योजना बनाते समय विवेक का इस्तेमाल नहीं करते।’
वहीं पीठ ने साउथ दिल्ली इलाके के दो बड़े अस्पतालों एम्स और सफदरजंग जाने वाली एंबुलेंस के रास्ते में भी इन इमारतों के निर्माण से बाधा पैदा होने की बात कही। पीठ ने कहा कि इन कॉलोनियों के मुख्य द्वार पर ट्रैफिक जाम लगने से अस्पताल जाने वाले लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी। ऐसे में लोग इन अस्पतालों तक कैसे पहुंचेंगे? इन मुद्दों को लेकर आपने अवश्य ही पर्यावरण प्रभाव आंकलन किया होगा, वह हमें दिखाएं।