दिल्ली हाई कोर्ट ने बांग्लादेश क्रिकेट टीम को अगले महीने शुरू होने वाले आईसीसी पुरुष टी 20 विश्व कप में भाग लेने से रोकने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता विधि छात्रा को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी याचिका दायर कर उन्होंने कोर्ट का समय बर्बाद किया। सलाह दी कि वे अपना समय व्यर्थ करने के बजाय कुछ रचनात्मक काम करें।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने याची के अधिवक्ता से पूछा, यो कैसी याचिका है। जो याची के मन में आया, उसे याचिका का विषय बना दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद या अन्य विदेशी संस्थाओं जैसे बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड या बांग्लादेश उच्चायोग को कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। याचिका में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही कथित हिंसा का हवाला देते हुए मांग की गई थी कि बांग्लादेश टीम को टी-20 विश्व कप सहित सभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित किया जाए।
याचिका में बीसीसीआई, आईसीसी, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बीसीसीआई की ओर से पेश हुए। उन्होंने बताया कि याचिका में कई विदेशी संस्थाएं शामिल हैं। पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में निर्णय विदेश मंत्रालय का विषय है और भारतीय अदालतें विदेश नीति में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दायर न करें। कोर्ट जुर्माना लगा सकता है।