उच्च न्यायालय ने 2015 की इस घटना के संबंध में याचिकाकर्ता धीरज कुमार को 75 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। उस समय कुमार 21 साल के थे।
घटना दिसंबर 2015 में वेस्ट पंजाबी बाग इलाके के निकट हुई थी, उस वक्त कुमार और उनके पिता मोटरसाइकिल से घर जा रहे थे। इस दौरान उनकी मोटर साइकिल पुलिस अवरोधकों से टकरा गई थी ।
पीड़ित को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई ऑपरेशनों और इलाज के बाद उसे बेहोशी की हालत में ही छुट्टी दी गई थी। अदालत को बताया गया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के सारांश रिकॉर्ड के मुताबिक वह स्पष्ट रूप से सोचने या ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ था और अब तक उसकी हालत ऐसी ही है।
युवक के पिता ने उच्च न्यायालय का रुख कर इलाज का खर्च, आय का नुकसान समेत अन्य कारणों का हवाला देकर मुआवजे का अनुरोध किया था।
वहीं, पुलिस ने कहा था कि हादसा कुमार की लापरवाही के कारण हुआ। वह तेज गति से बाइक चला रहा था और अवरोधकों से टक्कर नहीं हो, इसके लिए समय पर ब्रेक नहीं लगा पाया।