हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और उपेक्षा-मुक्त रहने के माहौल की आवश्यकता पर जोर देते हुए एक 80 वर्षीय महिला के बेटे, बहू और पोते-पोतियों को उस घर को खाली करने का निर्देश दिया है, जिसमें वे साथ रह रहे थे। महिला ने दोनों पर उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने 27 अगस्त को पारित फैसले में कहा कि बहू का निवास एक ऐसा अधिकार नहीं है जिसे समाप्त नहीं किया जा सकता और इस अधिकार को वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली सुरक्षा के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए जो उन्हें परेशान करने वाले लोगों को बेदखल करने की अनुमति देता है।
अदालत ने कहा यह मामला एक बार-बार होने वाले सामाजिक मुद्दे को उजागर करता है, जहाँ वैवाहिक कलह न केवल शामिल जोड़े के जीवन को बाधित करता है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को भी काफी प्रभावित करता है। इस मामले में बुजुर्ग याचिकाकर्ताओं को अपने जीवन के एक नाजुक चरण में लगातार पारिवारिक संघर्षों के कारण अनावश्यक संकट का सामना करना पड़ा। यह स्थिति पारिवारिक विवादों के बीच वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को संबोधित करने की आवश्यकता को दर्शाती है।वरिष्ठ नागरिक के अधिकारों के साथ-साथ बहू के आवासीय अधिकारों का सम्मान करने वाले समाधान की सुविधा के लिए अदालत ने बेटे को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी को 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करे ताकि वह अपने लिए वैकल्पिक आवास सुरक्षित कर सके।
अदालत ने आदेश दिया एक बार वित्तीय सहायता शुरू हो जाने के बाद पुत्र, पुत्रवधू और दो बच्चे दो महीने के भीतर संबंधित संपत्ति को खाली कर देंगे और खाली कब्जा याचिकाकर्ता को सौंप देंगे।
अदालत ने पाया कि विवरण याचिकाकर्ता के दैनिक जीवन की एक व्यथित तस्वीर पेश करते हैं, जो उपेक्षा, स्वास्थ्य संबंधी खतरों और मनोवैज्ञानिक संकट से भरा हुआ है। अदालत ने कहा ऐसी परिस्थितियां वरिष्ठ नागरिकों के रहने के माहौल को सुरक्षित, सम्मानजनक और किसी भी तरह के दुर्व्यवहार या उपेक्षा से मुक्त रखने की आवश्यकता पर जोर देती हैं, जो वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के मूल उद्देश्यों के अनुरूप है।
अदालत ने कहा कोविड-19 के संपर्क में आने के जानबूझकर आरोप परिवार के सदस्यों से बुजुर्गों के प्रति अपेक्षित देखभाल के कर्तव्य का गंभीर उल्लंघन दर्शाते हैं, जो इस तरह के स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा, पालतू जानवरों की मौजूदगी, जिनका रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता है, जिससे अस्वास्थ्यकर स्थिति पैदा होती है, बुजुर्ग दंपति के प्रति अनादर और उपेक्षा को और बढ़ा देती है।