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दिल्ली हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा पर लगाई रोक

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दिल्ली के त्रिलाकपुरी इलाके में बुधवार को ई-रिक्शा के कारण हुई मौत को आधार बनाते हुए बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा पर पूरी तरह रोक लगा दी है। साथ ही मामले में दिल्ली पुलिस, एमसीडी और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
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हाईकोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई 14 अगस्त को रखी है। तब तक दिल्ली में ई-रिक्शा पर रोक पूरी तरह रोक लगी रहेगी। गौरतलब है कि ई-रिक्शा को पहले ही गैरकानूनी ठहराकर प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन कुछ राजनैतिक पार्टियों के दबाव में इस पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकी।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी और ई-रिक्शा के संचालन में जिनका हाथ हो, उन पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी। इसके बावजूद ई-रिक्शे की वजह से ही मंगलवार रात वो हादसा हुआ, जिसने हाईकोर्ट को स्वतः संज्ञान लेने पर मजबूर कर दिया।
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खौलती कड़ाही में गिर गया मासूम

दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में मंगलवार शाम ई-रिक्शे से टक्कर लगने के बाद मां की गोद से उछलकर ढाई वर्षीय बच्चा सड़क किनारे हलवाई की कड़ाही में गिर गया था।

स्थानीय लोगों ने मां-बेटे को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां बुधवार को उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

दरअसल, ई-रिक्शे से लोगों की सुरक्षा पर खतरा होने का संदेह इसके शुरू होने के दिनों से ही जताए जा रहे हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक लाभों के लिए हमेशा सरकारें इसे संरक्षित करती रहीं।

यहां तक कि इसे गैरकानूनी ठहराए जाने बाद भी इसे रोका नहीं गया। अब हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मामले में दिल्ली पुलिस, एमसीडी और दिल्ली सरकार से  जवाब मांगा है।
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केजरी, गडकरी, शीला, सबने बचाया

दिल्ली के पूर्व परिवहन मंत्री रमाकांत गोस्वामी ने एक बार निर्माता कंपनियों की बिक्री पर रोक लगाने के अलावा एनफोर्समेंट के आदेश भी दिए थे, लेकिन दबाव में सब कुछ रोक दिया गया। ई-रिक्शा विक्रेताओं की राजनीतिक पहुंच है तो चालक राजनीतिक दलों के वोट बैंक बन गए हैं।

यही वजह है कि शुरुआत में शीला दीक्षित तो फिर अरविंद केजरीवाल ने इन्हें संरक्षण दिया। अब भाजपा के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बिना कानूनी पहलुओं को समझे-परखे इसे नॉन मोटराइज्ड वाहन में शामिल करने की मीठी गोली देकर बीमारी टालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बीमारी बढ़ती जा रही है।

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर में ट्रांसपोर्ट प्लानिंग डिपार्टमेंट के हेड डॉ. पीके सरकार कहते हैं कि बैटरी रिक्शा बहुत खतरनाक हैं। भारी वाहनों के बीच में कहीं भी दौड़ पड़ते हैं। ई-रिक्शा की स्पीड ज्यादा है और टक्कर लगते ही पलट जाते हैं। बाहरी सड़कों पर इन्हें नहीं आना चाहिए।
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