पाकिस्तान में पैदा हुई गेमारियाह (Gemariah) की उम्र चार साल है और वह अनाथ है। बच्ची की बुआ शाजिया नाज ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपील की थी कि इस अनाथ बच्ची को रखने का अधिकार उसे दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले का निपटारा पाकिस्तान की कोर्ट में ही हो सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट इस पर कोई फैसला नहीं दे सकती।
गेमारियाह जब महज दो साल की थी तभी पाकिस्तान में उसके पिता का देहांत हो गया। उसके पिता परिवारा की आमदनी का एकमात्र सहारा थे। बच्ची की मां ने तय किया कि वह भारत जाकर अपना कोई कारोबार शुरु करेंगी। 13 जून 2012 को वह अपनी बेटी के साथ कश्मीर आईं।
अगले दिन यानि 14 जून को वह अपनी बेटी के साथ काम के सिलसिले में कहीं जा रही थीं। रास्ते में उनका एक्सीडेंट हुआ और इस हादसे ने इस मासूम बच्ची से उसकी मां को भी छीन लिया।
अस्पताल से कैसे लापता हुई मासूम बच्ची
घायल हालत में बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया। ठीक होने के बाद बच्ची कहां गई इसे लेकर विवाद पैदा हो गया। लाहौर में रहने वाली उसकी बुआ ने दिल्ली हाईकोर्ट में बच्ची के लापता होने और उसकी कस्टडी के लिए याचिका दाखिल की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने दिल्ली सहित जम्मू-कश्मीर पुलिस को बच्ची का पता लगाने का ओदश दिया। तफ्तीश में पता चला कि बच्ची अपने मामा-मामी के साथ कश्मीर के ही अवंतीपुर क्षेत्र में रह रही है।
सोमवार को बच्ची की बुआ ने फिर से कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि बच्ची को उसके हवाले किए जाने का आदेश दे। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप न करने का फैसला लिया।
पाकिस्तान में ही होगा इस बच्ची के भविष्य का फैसला
न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ ने बुआ की उस याचिका को खारिज कर दिया कि बच्ची को उनके हवाले किया जाए। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बच्ची के मां-बाप और उसके मामा-मामी सहित अपील करने वाली बुआ भी पाकिस्तानी नागरिक हैं।
चूंकि अब यह मामला बच्ची की गुमशुदगी का नहीं बल्कि उसकी कस्टडी का है, इसलिए इसका फैसला पाकिस्तानी अदालत में ही किया जा सकता है।
हालांकि कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाकिस्तानी हाई कमीश्नर को भी पेश होने के लिए कहा था लेकिन वह नहीं आ सके। कोर्ट ने बच्ची की बुआ से कहा कि उन्हें इस मामले को पाकिस्तानी हाई कमीश्नर के पास ले जाना चाहिए। अगर उन्हें कोई मदद नहीं मिलती तो उन्हें विदेश मंत्रालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।