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अब दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे हुआ टोल फ्री

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दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे के सिरहौल टोल प्लाजा पर बृहस्पतिवार से कोई टोल नहीं लगेगा। इस संबंध में अदालत के बाहर तीनों पक्षों में हुए समझौते पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी है। हालांकि दिल्ली नगर निगम पहले की तरह व्यावसायिक वाहनों से टोल वसूलता रहेगा।
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नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), दिल्ली-गुड़गांव सुपर कनेक्टिविटी लिमिटेड (डीजीएससीएल) व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी (आईडीएफसी) ने आपसी रजामंदी से सभी लेन-देन का विवाद समाप्त कर दिया।

न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह के समक्ष सभी पक्षों के प्रतिनिधियों ने समझौते का प्रारूप दिया। उन्होंने बताया कि अब उनके बीच किसी भी तरह का विवाद नहीं रहा है। रजोकरी बार्डर (सिरहौल) के पास बने टोल प्लाजा को बुधवार रात से ही हटा दिया जाएगा।
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एमसीडी व्यावसायिक वाहनों से लेता रहेगा टोल

बृहस्पतिवार से यह टोल फ्री तो हो जाएगा। लेकिन एमसीडी व्यावसायिक वाहनों से टोल लेता रहेगा। वहीं अदालत ने कहा कि 16 लेन के एक्सप्रेसवे की 12 लेन आम लोगों की सुविधा के लिए टोल फ्री रहेंगी। चार लेन एमसीडी को दी जाएंगी ताकि वह उसके जरिए दिल्ली आने वाले व्यावसायिक वाहनों से टोल वसूल सके।

अदालत ने सभी पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद कहा कि आईडीएफसी अब डीजीएससीएल को 24 करोड़ 65 लाख रुपये का भुगतान करेगी, जिसमें से 8.85 करोड़ पहले ही दिए जा चुके हैं। इसके अलावा पहले से बकाया 15.801 करोड़ रुपये का भी 28 फरवरी तक भुगतान किया जाएगा।

दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे के सिरहौल टोल प्लाजा को बुधवार रात 12 बजे से टोल मुक्त करने का फैसला किया गया है। इस संबंध में कोर्ट के बाहर तीनों पक्षों में हुए समझौते पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी है। दूसरी तरफ, एक्सप्रेसवे के निर्माण से पहले की तरह दिल्ली नगर निगम टोल प्लाजा पर दिल्ली आने-जाने वाले व्यावसायिक वाहनों से चुंगी वसूलता रहेगा।

समझौते पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी लगाई मुहर

दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे के सिरहौल टोल प्लाजा को लेकर लंबे समय से चला आ रहे विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों पक्षों नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), दिल्ली गुड़गांव सुपर कनेक्टिविटी लि. (डीजीएससीएल) और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (आईडीएफसी) के बीच कोर्ट के बाहर हुए समझौते को मानते हुए अपनी मुहर लगा दी।

लेकिन, मंगलवार को अपना पक्ष रखने के कारण अदालत ने दिल्ली नगर निगम को पुराने ढर्रे पर कमर्शियल वाहनों से चुंगी वसूली की इजाजत दे दी। चुंगी वसूली के लिए आने-जाने वाली दो लेन में इसकी व्यवस्था होगी। अदालत ने टोल कंपनी को फैसले के 48 घंटे बाद टोल खाली करने के निर्देश दे दिए हैं। डीजीएससीएल पर आरोप है कि उसने आईएफडीसी से एनएचएआई की अनुमति के बिना 1600 करोड़ रुपये लोन ले लिया था।

इसके बाद एनएचएआई ने कंपनी से अपना करार खत्म कर दिया था। तीनों के बीच अदालत के बाहर हुए करार में सिरहौल टोल को पूरी तरह से समाप्त करने, सिरहौल टोल के  वाहनों का पैसा खेड़कीदौला टोल प्लाजा पर इकट्ठा वसूलने और देनदारी का भुगतान करना प्रमुख है।

टोल हटाए जाने के पीछे क्या है असली वजह?

दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे के सरहौल टोल को हटाने में सबसे बड़ा कारण यहां लगने वाला भीषण जाम रहा है। इसके खिलाफ लगातार आवाजें उठती रहीं, लेकिन इससे संबंधित कंपनी ने कभी कोई ठोस प्रयास नहीं किया। इसको लेकर सरकारी महकमे से जो निर्देश मिले, उस पर अमल करने की बजाय कंपनी अपना टालू रवैया अपनाए रखा।

वक्त के साथ टोल फीस में तो बढ़ोतरी होती रही, लेकिन सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ। कई बार तो हालात इस कदर बिगड़े कि ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन को स्वयं पहल करके टोल के बैरियर उठाने पड़े। पिछले दो सालों में दर्जनों बार ऐसा हुआ।

इसी कारण टोल कंपनी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में केस भी किया था। लेकिन जाम ने टोल कंपनी की अव्यवस्थाओं को ऐसा उजागर किया कि इससे बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं छोड़ा। रही-सही कसर ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन की दलीलों ने पूरी कर दी।

जाम से निपटने के तमाम उपाय हारे

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 16 अगस्त 2012 और पांच सितंबर 2012 को 15-15 दिन के लिए टोल फ्री किया था। हाईकोर्ट का निर्देश था कि जाम का हल निकालकर ही टोल वसूला जाए। टोल कंपनी ने कई व्यवस्थाएं भी कीं, लेकिन सब खानापूर्ति ही नजर आई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर टोल कंपनी ने कनोपी लगाकर टोल शुल्क वसूलने का प्रयोग किया था। यह प्रयोग दूसरे दिन ही फेल हो गया।

इसके बाद टोल प्लाजा की कैश लेन में अस्थाई पांच-पांच बूथ बनाए गए। कैश लेन में मशीनें लेकर टोलकर्मी गेट से पहले टोल वसूलते नजर आए। इसके बावजूद जाम कम नहीं हुआ। पीक ऑवर्स में दो लेन को फ्री करके ट्रैफिक को आगे सात लेन से निकाला गया। इससे जाम खत्म करने में आंशिक रूप से तो सफलता मिली, लेकिन स्थाई समाधान नहीं निकल पाया।

सरहौल टोल के दोनों तरफ ऐसी संरचना बनाई गई, जिसमें 18 टोल बूथ एक साथ न होकर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर माने गए। इसके बावजूद वाहनों का दबाव इतना अधिक रहा कि तीन दिन के भीतर ही यह व्यवस्था हटानी पड़ गई। इसके साथ ही टोकन के तरीके में किया गया बदलाव भी वापस ले लिया गया।
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रियल एस्टेट और उद्योगों को होगा लाभ

सरहौल टोल हटने से रियल एस्टेट और उद्योगों को भी लाभ होगा। द्वारका-मानेसर एक्सप्रेसवे पर आ रहे प्रोजेक्ट के मंदा रहने का एक कारण सरहौल और खेड़कीदौला टोल को भी माना जा रहा था।

गुड़गांव रिहायशी प्रोजेक्ट के लिहाज से देशभर में सबसे हॉट डेस्टिनेशन रहा है। इसके बावजूद सरहौल और खेड़कीदौला टोल पर लगने वाले लंबे जाम की वजह से निवेशक यहां निवेश करने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं।

चूंकि अब सरहौल टोल हट गया है तो रियल एस्टेट को भी लाभ मिलने के आसार जताए जा रहे हैं। इस टोल के हटने से धारूहेड़ा और भिवाड़ी तक रियल एस्टेट के उछाल की उम्मीदें बढ़ गई हैं। मानेसर और इससे आगे कई व्यापारिक हब भी स्थापित होंगे। टोल हटने के बाद उद्योगों को भी यहां स्थापित होने में बेहतर सुविधा मिलेगी।
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