कई साल से खाली पड़ा है बंगला
यह दो मंजिला इमारत कई वर्षों से खाली पड़ी है। अधिकारियों के बीच इसे "अशुभ" माना जाता है। कथित तौर पर लगातार रहने वाले इसमें जाने से कतराते रहे हैं। यह बंगला कभी दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश का निवास था। वे 1952 में पदभार संभालने के बाद यहां आए थे। हालांकि, एक कथित घोटाले के बाद उन्होंने 1955 में अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दे दिया। 1993 में, यह बंगला मदन लाल खुराना को आवंटित किया गया था। उन्होंने यहां कार्यालय चलाया लेकिन अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। उन्होंने 1996 में इस्तीफा दे दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी इस बंगले के बजाय मथुरा सड़क पर एक छोटे बंगले को प्राथमिकता दी थी।
बंगले का इतिहास और 'मनहूस' प्रतिष्ठा
यह संपत्ति 1920 के दशक की है। तब अंग्रेजों ने सिविल लाइंस को वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया था। आजादी के बाद, दिल्ली विधानसभा के करीब होने के कारण यह मुख्यमंत्री के निवास के लिए पसंदीदा विकल्प बन गया। हालांकि, अपनी प्रमुख स्थिति और विशाल लेआउट के बावजूद, इसे हाल के वर्षों में कोई लेने वाला नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि इसकी "मनहूस" प्रतिष्ठा के कारण ऐसा हुआ।
हालिया घटनाएं और खाली रहने का कारण
2013 में, यह बंगला तत्कालीन प्रधान सचिव (बिजली) शक्ति सिन्हा को आवंटित किया गया था। लेकिन उन्होंने चार महीने के भीतर इसे छोड़ दिया। दिल्ली सरकार के पूर्व उद्योग मंत्री दीप चंद बंधु को भी यह बंगला आवंटित हुआ था। उनकी 2003 में अपने कार्यकाल के दौरान मृत्यु हो गई थी। पिछले साल समाज कल्याण मंत्री रविंदर इंद्रज सिंह के कार्यालय की एक टीम ने परिसर का निरीक्षण किया था, लेकिन मंत्री ने वहां जाने से इनकार कर दिया।