आदेश के अनुसार मान्यता लेने के लिए इच्छुक स्कूल 30 नवंबर तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद प्राप्त आवेदनों की छंटनी की जाएगी। मान्यता मानदंड को पूरा करने वाले स्कूलों की सूची जारी होगी। इसके लिए 73 मानकों वाला एक प्रारूप है। इस संबंध में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पिछले एक दशक से यह मुद्दा फाइलों में दबा रहा। हजारों बच्चे अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित रहे। दिल्ली में पहले सरकारों ने कुछ स्कूलों को मनमाने तरीके से मान्यता दी और कुछ स्कूलों की सरकार ने अनदेखी भी की थी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हमने इस भेदभाव का अंत किया है।
वर्ष 2013 के बाद अब मान्यता देने की पहल
उन्होंने कहा कि यह पहल संविधान के अनुच्छेद 21 ए और बच्चों के निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करती है। प्रशासनिक या स्थान संबंधी बाधाओं के कारण किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा। पिछला मान्यता अभियान 2013 में चलाया गया था। जिससे चुनिंदा अनुमोदनों के माध्यम से केवल कुछ ही स्कूलों को लाभ हुआ था।
20 हजार नई सीटें सृजित होने की उम्मीद
इस फैसले से लगभग 500 स्कूल अब शिक्षा निदेशालय के दायरे में आ जाएंगे। जिससे वैधता, नियामक निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। इस सुधार से हजारों छात्रों को सीधा लाभ होगा। हर वर्ष शिक्षा निदेशालय को लगभग 40000 सीटों के लिए ईडब्ल्यूएस/डीजी/सीडब्ल्यूएसएन श्रेणियों के तहत लगभग दो लाख आवेदन प्राप्त होते हैं। नई मान्यता नीति से लगभग 20 हजार अतिरिक्त सीटें सृजित होने की उम्मीद है। जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच का व्यापक विस्तार होगा।