दिल्ली सरकार दिल्ली विश्वविद्यालय को दिए जाने वाले सारे फंड रोकने जा रही है। मसला कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के गठन नहीं होने से जुड़ा है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने चेतावनी दी है कि 31 जुलाई तक अगर दिल्ली विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी का गठन नहीं किया गया तो सरकार करीब 350 करोड़ रुपये का फंड नहीं देगी।
सूत्र बताते हैं कि उपमुख्यमंत्री ने इस बारे में निदेशक (उच्च शिक्षा) को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा गया है कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी दे दें।
दरअसल, दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेज पूर्ण रूप से और 16 कॉलेज आंशिक तौर पर दिल्ली सरकार के फंड से चलते हैं। लेकिन सभी कॉलेज की गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल बीते साल अक्तूूबर में खत्म हो गया है।
अभी ये कॉलेज बगैर गवर्निंग बॉडी के चल रहे हैं। बीते साल सितंबर महीने से अब तक यह मसला करीब 11 बार पत्राचार व अलग-अलग फोरम पर उठाया गया। 14 जुलाई 2017 को विश्वविद्यालय की एक्जक्यूटिव काउंसिल की बैठक में गवर्निंग बॉडी की लिस्ट रखी गई थी। लेकिन सदस्यों के नाम पर रजामंदी नहीं बन पाई।
सूत्रों की मानें तो मनीष सिसोदिया ने हैरानी जताते हुए लिखा है कि उस वक्त गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी हुई, जब विश्वविद्यालय में तदर्थ व स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया चल रही है। दिल्ली सरकार ने विश्वविद्यालय को लगातार इसके लिये रिमाइंडर भी भेजा है।
इतनी देरी होने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने एक बार फिर अपने पैनल के नामों को रिव्यू करने के लिए कमेटी गठित की है। सूत्र बताते हैं कि उपमुख्यमंत्री ने निदेशक (उच्च शिक्षा) को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय को जानकारी दे दें कि अगर 31 जुलाई तक गवर्निंग बॉडी का गठन नहीं होता है तो दिल्ली सरकार से मिलने वाले सारे फंड रोक दिए जाएंगे। इस फंड से कॉलेज में वेतन दिया जाता है। वहीं, इमारत के निर्माण व मरम्मत समेत आकस्मिक कोष का धन भी जाता है।
28 कॉलेज को दिल्ली सरकार से मिलता है फंड
दिल्ली विश्वविद्यालय के 28 कॉलेज को 350 करोड़ रुपये का फंड दिल्ली सरकार देती है। इनके संचालन के लिए दिल्ली सरकार की गवर्निंग बॉडी होती है। इसका गठन सरकार और विश्व विद्यालय की तरफ से सुझाए गए नामों से होता है। एक्जक्यूटिव काउंसिल की 14 जुलाई की बैठक में विश्वविद्यालय के पैनल पर आपत्ति थी, जिसको रिव्यू करने के लिए विश्वविद्यालय ने कमेटी का गठन किया गया है।
गवर्निंग बॉडी नहीं होने से इन कामों पर असर
-करीब एक दर्जन कॉलेज में स्थायी प्रिंसिपल नहीं
-करीब दो हजार तदर्थ शिक्षक नहीं हो पा रहे स्थायी
-कॉलेजों में टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति प्रक्रिया नहीं बढ़ रही आगे।