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केंद्र से ज्यादा एमएसपी देगी दिल्ली सरकार, हर हाल में किसानों को लागत का उचित मूल्य देने का दावा

Wed, 30 Jan 2019 04:43 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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किसान - फोटो : Social Media
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स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के हिसाब से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने पर दिल्ली सरकार पर करीब 96.37 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। साथ ही, दिल्ली में पैदा होने वाले पूरे अनाज की खरीद भी प्रदेश सरकार को करनी होगी। मंगलवार को दिल्ली सरकार के कृषि सम्मेलन में यह आंकड़े सामने आए।
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इसमें विकास मंत्री गोपाल राय, फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, नेफेड, कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। गोपाल राय का दावा है कि सम्मलेन में आए सुझावों और किसानों की राय से 10 फरवरी तक सरकार इसका अंतिम प्रस्ताव तैयार कर लेगी। सरकार हर हालत में किसानों को लागत का उचित का मूल्य देगी।

सम्मेलन के बाद गोपाल राय ने कहा कि सरकार स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करने की दिशा में बढ़ रही है। इसके मुताबिक किसानों को प्रति क्विंटल गेहूं की खरीद 2616 और धान पर 2667 रुपये देने होंगे। केंद्र सरकार अभी 1840 और 1770 रुपये का एमएसपी दे रही है। गोपाल राय ने कहा कि केंद्र सरकार का एक सर्कुलर केंद्र से ज्यादा एमएसपी देने वाले राज्यों पर थोड़ी बंदिश लगाता है।
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इसके अनुसार, राज्य में पैदा होने वाले अनाज की खरीद उसे खुद करनी होगी। इस बारे में अधिकारियों ने कहा कि वह केंद्र को पत्र लिखकर इससे छूट की मांग करेंगे। इसकी वजह यह है कि दिल्ली में पैदा होने वाले अनाज की खपत दिल्ली में ही हो जाती है। यह प्रावधान उन राज्यों के लिए है, जहां खपत से ज्यादा उत्पादन होता है। सम्मेलन में तेलंगाना के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। तेलंगाना एक अलग मॉडल पर काम कर रहा है। इसमें अनाज खरीदने की जगह प्रदेश सरकार फसल की लागत का आकलन करके उसके हिसाब से एकमुश्त राशि किसानों को दे देती है।

किसान जनसुनवाई 5 व 7 फरवरी को
गोपाल राय ने बताया कि सरकार ने सम्मलेन में आए सुझावों की परख के लिए एक कमेटी का गठन किया है। दोनों मॉडल पर किसानों की राय लेने के लिए 5 फरवरी को नरेला और 7 फरवरी को नजफगढ़ में किसान जनसुनवाई होगी। स्वतंत्र विशेषज्ञों की राय लेने के लिए दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर ड्राफ्ट डाला जाएगा। 10 फरवरी से पहले दिल्ली सरकार का अपना मॉडल तैयार होगा। इस मॉडल को मुख्यमंत्री के सामने पेश किया जाएगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी लेकर सरकार इसे लागू करेगी। 
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