नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने सरकारी तेल कंपनियों को एक करोड़ रुपये जुर्माना न भरने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान पीठ ने सभी तेल कंपनियों को चेताया है कि यदि उन्होंने दो हफ्तों के भीतर जुर्माने की राशि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास नहीं जमा की तो उनके निदेशकों को जेल भेजने का आदेश दिया जाएगा।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने तेल कंपनियों को तल्ख टिप्पणी में कहा कि यह पर्यावरण का मामला है। आप लोगों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में हम आपकी जिंदगी के साथ भी खेलेंगे। पीठ ने तेल कंपनियों के निदेशकों से कहा कि सलाखों के पीछे खड़े रहने में कोई नुकसान नहीं है। सितंबर में दिए गए आदेश का अभी तक पालन नहीं किया गया। यदि इस बार भी देरी हुई तो जेल भेजने का आदेश दिया जाएगा।
मामले पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी। पीठ ने कहा कि हलफनामे में कुछ तथ्य होने चाहिए वह फ्रॉड पर आधारित नहीं होने चाहिए। प्रत्येक बार होने वाली देरी के लिए या तो किसी का वेतन काटा जाएगा। यदि आदेश का अगली तारीख तक अनुपालन कर लिया जाता है तो जेल नहीं भेजा जाएगा। दो हफ्तों का समय है या तो आदेश का पालन करें या फिर जेल जाने के लिए तैयार रहें।
गौरतलब है कि फ्यूल स्टेशन पर तेल भरते वक्त बेहद बारीक और आंखों से न दिखने वाले प्रदूषण कण उड़ते हैं। इनकी रोकथाम के लिए वैपर रिकवरी सिस्टम संचालित लगाया जाता है। पीठ ने सभी तेल कंपनियों को जुर्माने की राशि जमा करने के बाद हलफनामा भी दाखिल करने का आदेश दिया है।