मतदाता सूची से मतदाताओं का नाम कटने के मामले की दिल्ली सरकार जांच कराएगी। जरूरत होने पर मामला सीबीआई को सौंपा जाएगा। मंत्री इमरान हुसैन ने मंगलवार को दिल्ली विधान सभा में यह जानकारी दी। वे सदन में मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़ी अल्पकालिक चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे थे।
उन्होंने बताया कि बीते चार सालों में करीब दस लाख वोट काटे गए हैं। स्थानीय स्तर के कर्मचारियों ने कानून को ताक पर यह कार्रवाई की। इस मौके पर विधायक सौरभ भरद्वाज ने इसी से जुड़ा एक प्रस्ताव भी पेश किया। इसके बाद विधानसभा का विशेष सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया।
मंगलवार को चर्चा की शुरुआत विधायक पंकज पुष्कर ने की। इस दौरान दूसरे कई आप विधायकों ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव कार्यालय ने बीते चार सालों में करीब दस लाख वोट काट दिए हैं। इस दौराननियमों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय स्तर पर इस काम से जुड़े कर्मचारियों ने अपने मनमाने तरीके से लिस्ट से नाम निकाला है। सहीराम ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों का वोट भी काट दिया गया है।
आप वोटर लिस्ट के मामले में झूठा प्रचार कर रही है।
उधर, पूरी चर्चा को गलत बताते हुए नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आप वोटर लिस्ट के मामले में झूठा प्रचार कर रही है। मतदाता सूची के रिवीजन के दौरान वोटर लिस्ट में नाम हटाए भी जाते हैं और नए मतदाताओं का वोट भी बनता है। बीते चार सालों में दिल्ली मुख्य चुनाव कार्यालय ने लिस्ट से जितने नाम काटे हैं, उससे कहीं ज्यादा नाम जुड़े भी हैं। उन्होंने अलग-अलग विधान सभाओं में नाम कटने व जुड़ने वाले मतदाताओं की संख्या भी सदन को बताई। इससे जुड़े दस्तावेज भी सदन में रखे।
प्रस्ताव: विधायकों के साथ चुनाव अधिकार डोर-टू-डोर सर्वे करें
प्रस्ताव में कहा गया है कि सदन दिल्ली चुनाव कार्यालय को यह निर्देश दे कि विधायकों के साथ चुनाव अधिकारी डोर-टू-डोर सर्वे करें। इस दौरान जिसका नाम गलत तरीके से निकाला गया है, उसका नाम बगैर किसी औपचारिकता के मतदाता सूची में शामिल किया जाए। इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए। सर्वे लोक सभा चुनाव से पहले पूरा कर लिया जाए। दूसरी तरफ दिल्ली सरकार इस मामले की जांच करे। तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सदन में पेश की जाये। विधान सभा ने ध्वनि मत से सौरभ भारद्वाज के प्रस्ताव को पास कर दिया।
विजेंद्र के संशोधनों को ध्वनित मत से नकारा
नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इसमें दो संशोधन रखे। उनके मुताबिक, पुराने चुनाव अधिकारी अभी दिल्ली के मुख्य सचिव बने हैं। इस प्रस्ताव की भाषा मुख्य सचिव पर दबाव डालने वाली है। इसे दुरूस्त किया जाए। दूसरी तरफ पूरा प्रस्ताव सियासी है। इसमें बेवजह केंद्र सरकार व भाजपा का नाम लिया जाए। प्रस्ताव ने इसे निकाला जाए। लेकिन सदन ने गुप्ता के संशोधन को ध्वनि मत से नकार दिया।