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दिल्ली सरकार की सख्ती से इस बार नहीं बढ़ेगी बिजली की कीमत

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दिल्ली सरकार की सख्ती और कीमत तय करने वाली संस्था दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग पर दबाव का असर इस बार बिजली
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कीमतों की घोषणा में दिखना तय है।

डीईआरसी ने डिस्कॉम्स के प्रोजेक्ट की ऑडिट में भी खामियां पाई हैं। बिजली कीमत नहीं बढ़ने की एक वजह सीएजी की अंतरिम लीक रिपोर्ट भी हो सकती है।

दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) के चेयरमैन पी.डी.सुधाकर ने कहा कि डिस्कॉम की ओर से दाखिल एग्रीगेट रेवेन्यु रिक्वायरमेंट (एआरआर) की जांच करने के बाद लगा था कि एक से दो फीसदी बिजली कीमत बढ़ानी होगी।

कागजों की जानकारी और जमीनी हकीकत में अंतर

आयोग की टीम ने जब डिस्कॉम्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर और चल रहे प्रोजेक्ट का फिजिकली वेरिफिकेशन किया तो पता चला कि कागजों पर दी गई जानकारी और जमीनी हकीकत में अंतर है।

चेयरमैन पी.डी.सुधाकर ने कहा कि तीनों बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल), बीएसईएस की राजधानी और यमुना पावर लिमिटेड के प्रोजेक्ट जांच में खामियां पाई गई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह खामी इतनी बड़ी भी नहीं है, लेकिन इसका असर बिजली कीमत पर पड़ना तय है। अभी तक की रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि वित्त वर्ष-2015-16 में बिजली कीमत बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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टैरिफ नहीं बढ़ा तो नीहं बढ़ेगी कीमत

हालांकि बिजली वितरण कंपनियों ने आयोग के सामने 20 फीसदी तक बिजली कीमत बढ़ाने की मांग रखी है। सीएजी की अंतरिम लीक रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी कि डिस्कॉम्स ने अपने घाटे को 8000 करोड़ रुपये ज्यादा बताया है।

बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि डिस्कॉम्स का रेगुलेटरी एसर्ट बढ़कर 25000 करोड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में बिजली कीमत नहीं बढ़ती है तब बिजली आपूर्ति करना आसान नहीं होगा।

टीपीडीडीएल के सीईओ प्रवीर सिन्हा का कहना है कि यदि बिजली उत्पादन कंपनियों और ट्रांसमिशन कंपनी का टैरिफ नहीं बढ़ता है या कम कर दिया जाता है तो बिजली कीमत नहीं भी बढ़े तो डिस्कॉम्स को कोई दिक्कत नहीं होगी। अब देखना होगा कि आयोग बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन कंपनी के लिए कीमत बढ़ाता है या नहीं।
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