कार्यक्रम में दिल्ली के मौखिक इतिहास पर आधारित दो वीडियो क्लिप भी दिखाई गईं, जिनमें से एक अंबेडकर यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा तैयार की गई, जबकि दूसरा वीडियो दिल्ली के अभिलेखागार विभाग द्वारा तैयार किया गया।
इतिहासकार इरफान हबीब ने कहा कि दिल्ली के इतिहास को मौखिक रूप से सहेजने के लिए दिल्ली सरकार का यह प्रयास बेह सराहनीय है। लोग अब तक दिल्ली के इतिहास से जुड़े पौराणिक युद्धों या किसी राजतंत्र के उत्थान एवं पतन की कहानियां सुनते हैं, लेकिन दिल्ली के आम लोगों के जीवन की संस्कृति क्या है? इसके बारे में कोई नहीं जानता। डेनिस लैटन ने कहा कि ओरल हिस्ट्री प्रोग्राम के लिए उन लोगों को चुना जा रहा है, जो दिल्ली के जमीनी इतिहास की संस्कृति से होकर गुजरे हैं। प्रोग्राम के तहत अगले दो सालों में 100 लोगों के साक्षात्कार करने का लक्ष्य है।
लोग खुद भी दे सकते हैं कहानियां सुनाने के प्रस्ताव
जो लोग दिल्ली की संस्कृति और जीवनशैली से जुड़े इतिहास का हिस्सा रहे हैं, वे खुद दिल्ली सरकार के अभिलेखागार विभाग से संपर्क कर सकते हैं। उनकी कहानियों को भी मौखिक साक्षात्कार के रूप में रिकॉर्ड करके ओरल हिस्ट्री प्रोग्रोम का हिस्सा बनाया जाएगा। लोग अपने प्रस्ताव ddarchives@nic.in पर भेज सकते हैं।