बच्चों के साथ छेड़छाड़ और शोषण की घटनाएं रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने उन्हीं के बीच पहुंचने का फैसला किया है।
जागरूकता कार्यक्रम में 5-8 वर्ष के बच्चों को अपनों की अच्छी-बुरी नीयत के बारे में समझाया जाएगा, तो 9-12 वर्ष के बच्चों को शरीर के परिवर्तन को समझने और शारीरिक शोषण को लेकर मना करने की प्रवृत्ति बताई जाएगी। वहीं 12-18 वर्ष के किशोरों को शारीरिक शोषण और छेड़छाड़ के कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. सतबीर बेदी ने बताया कि एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि बच्चों के साथ गलत व्यवहार करने वाले 75 फीसदी पहचान वाले ही होते हैं।
अगर बचाव के उपाय किए जाएं और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो काफी हद तक छेड़छाड़ और शोषण की घटनाओं को टाला जा सकता है। डॉ. बेदी ने बताया कि स्टे सेफ-प्रिवेंशन-एजुकेटिंग चिल्ड्रन नाम से पहले एक दिन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इसमें जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर व्यापक स्तर पर 2 अक्तूबर से 14 नवंबर तक कार्यक्रम चलेगा। आगे कार्यक्रम को एमसीडी और सरकारी स्कूल में भी ले जाया जाएगा।