दुकान खुलने पर सोशल डिस्टेंसिंग नहीं होगा तार-तार
लॉकडाउन 2020 में जब लॉकडाउन खोला गया था और शराब के केंद्र खुले थे तो शराब की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार हुई थी। इस साल भी जब कोविड की दूसरी लहर में लॉकडाउन की घोषणा होने के साथ ही शराब के केंद्रों पर भीड़ उमड़ पड़ी। घंटे-दो घंटे में दुकानों का शटर गिर गया था। लिहाजा अगर यह नीति लागू हो जाती है तो दुकानों के खुलने पर भीड़ नहीं उमड़ेगी।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली आबकारी नीति 2010 में भी इस तरह का प्रावधान था। हालांकि, यह प्रचलन में नहीं आया था। क्योंकि इस नीति में स्पष्ट तौर पर होम डिलिविरी के प्रावधानों में कई पेंच थे। द्वारका, लाजपतनगर समेत कुछ वीवीआईपी इलाकों में चोरी-छुपे होम डिलिवरी की सुविधा थी। हालांकि, यह प्रचलन में कभी नहीं आया। दिल्ली सरकार ने भी कहा है कि एल-13 कोई नया लाइसेंस का नियम नहीं है, इसमें महज संशोधन किया गया है।
अदालत ने भी चिंता जाहीर की थी
पिछले साल लॉकडाउन खुलते ही शराब केद्रों पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। स्थानीय पुलिस प्रशासन तक से भीड़ नियंत्रित नहीं हो पा रहा था। दिल्ली ही नहीं कई राज्यों में ऐसा देखने को मिला था। इस स्थिति में अदालत ने भी चिंता जाहीर की थी। सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रख विचार करने को कहा गया था।
दिल्ली सरकार को आय का स्त्रोत
आबकारी विभाग के नये नियम से दिल्ली सरकार के आय का स्त्रोत भी बढ़ेगा। दिल्ली में लॉकडाउन होने की स्थिति में शराब की बिक्री नहीं हो रही है, जबकि यह दिल्ली सरकार के मुख्य आय का स्त्रोत है। नये नियम से आर्थिक रूप से टूटी दिल्ली सरकार की कमर को दो हजार करोड़ तक अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है।
नये नियमों के तहत आवश्यक लाइसेंस धारकों को खुली जगहों पर भी शराब परोसने की अनुमति दी गई है। छतों, क्लब परिसार, रेस्तरां में भी शराब परोसने की अनुमति होगी। हालांकि इसके लिए लाइसेंस लेना होगा जिसके तहत कई नियम व शर्तो का पालन अनिवार्य होगा। नई नीति के तहत दिल्ली सरकार को 1500-2000 करोड़ रुपया अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है।