मुख्यमंत्री ने बताया कि एप को लॉन्च कर दिया गया है। इसे गुगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा। इस एप में किसी तरह की परेशानी आती है, यानी जहां प्रदूषण हो रहा है उसका वीडियो अपलोड करने में, ऑडियो अपलोड करने में या एंड्रायड फोन से खींचे हुए फोटो अपलोड करने में तो वह भी परेशानी दूर की जाएगी। कहीं निर्माण कार्य के कारण धूल उड़ रहे है तो उसकी भी शिकायत दर्ज होगी।
स्थानीय निकाय को भी जोड़ा जाएगा
प्रदूषण के खिलाफ जंग में सभी स्थानीय निकाय को जोड़ा जाएगा। इस एप के माध्यम से दिल्ली एमसीडी, एनडीएमसी, दिल्ली विकास प्राधिकरण समेत अन्य निकाय के साथ दिल्ली सरकार के भी सभी मंत्रालय जुड़ेंगे। ताकि सभी के अधिकारी मिलकर प्रदूषण की समस्या का निदान कर सकें।
क्या मिलेगी सुविधा
एप के माध्यम से दिल्ली वाले कही कूड़ा जल रहा हो उसका वीडियो बना कर फेज सकेंगे। उस जगह फोटो बना कर फेज सकेंगे, वॉयस ऑडियो भेज सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि जैसे ही यह शिकायत ग्रीन वॉर रूम में पहुंचेंगा तो वहां पता चल जाएगा कि कहा से किस लोकेशन से शिकायत की गई है। इसके बाद उचित कारवाई की जाएगी।
एप पर रजिस्ट्रेशन के लिए मोबाइल नंबर देना होगा
एप पर रजिस्ट्रेशन के लिए सबसे पहले मोबाइल नंबर देना होगा। इस एप पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में शिकायत करने की सुविधा होगी। होम पेज पर यह भी देख सकेंगे कि कितनी शिकायत की गई और कितना का समाधान हुआ है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहीं ये बातें-
जबतक दिल्ली के लोग इस अभियान से नहीं जुड़ेंगे तबतक समस्या का समाधान नहीं होगा। इसमें आम लोगों की भी भागीदारी जरूरी है। पिछले साल आम लोगों की भागीदारी की वजह से ही 25 प्रतिशत प्रदूषण की कमी दर्ज की गई। औद्योगिक क्षेत्र के प्रदूषण को फ्यूल बदलकर कम किया गया। इस साल सारी दिल्ली के खेतों में मुफ्त केमिकल का छिड़काव किया जा रहा है। नतीजे अच्छे आए है। यह सफल हो गया तो पराली से धुंए की समस्या का समाधान हो जाएगा।
किसान पराली जलाना नहीं चाहते। इस छिड़काव से पराली खाद में तब्दिल हो जाएगी। उम्मीद है कि दिल्ली सरकार की इस पहल को अन्य राज्य की सरकारें भी अपनाएंगी। अगले साल तक पराली से फैलने वाले प्रदूषण पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाएगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति से भी काफी राहत मिलेगी। इस अभियान के तहत दिल्ली वालों को जुडऩा होगा। कोई भी बदलाव नहीं आ सकता जबतक जनता ना जुड़े।