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दिल्ली सरकार को अब शराब से आस, जीएसटी भुगतान न मिलने से परेशान खोज रही राजस्व बढ़ाने के उपाय!

Fri, 11 Sep 2020 05:27 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली सरकार ने कहा, टैक्स में कमी से खर्च चलाना मुश्किल, केंद्र से वित्तीय मदद देने की अपील
  • टैक्स कलेक्शन में कमी से कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका
  • आर्थिक गतिविधियों में कमी के कारण जीएसटी कलेक्शन में आई कमी से बिगड़ा केंद्र-राज्यों का बजट
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Delhi Liquor Shops - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के कारण सरकार के बजट कलेक्शन पर बुरा असर पड़ा है। इससे जनहितकारी योजनाओं पर असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया है। यही कारण है कि सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर आबकारी माध्यम से आमदनी बढ़ाने की नई संभावनाओं पर विचार करने को कहा है। सरकार को वर्ष 2020 में शराब पर लगाए गए कर से कुल टैक्स का 14.1 फीसदी हिस्सा राजस्व प्राप्त हुआ था। दिल्ली के वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 65 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इसके पिछले वर्ष के लिए 60 हजार करोड़ रुपये का बजट और 2015 में 30 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था।

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कुल राजस्व में शराब पर लगे टैक्स का हिस्सा

शराब पर लगाए गए टैक्स से सरकार को भारी आय होती है। वर्ष 2020 में शराब पर लगाए गए टैक्स से कुल टैक्स कलेक्शन का 14.1 फीसदी हिस्सा प्राप्त हुआ था। इसके पहले 2019 में यह हिस्सा 13.5 करोड़ था। वर्ष 2018 में शराब से सरकार को 12.4 फीसदी, 2017 में 13.6 फीसदी, 2016 में 13.9 फीसदी और 2015 में 12.8 फीसदी का राजस्व प्राप्त हुआ था।

इस तरह बढ़ा राजस्व

वर्ष 2008-09 में सरकार को एक्साइज से 1420.91 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। लेकिन 2016-17 तक यही राजस्व बढ़कर 4251.40 करोड़ रुपये हो गया था। इसके बाद के वर्षो में भी शराब के शौकीनों ने सरकार का खजाना भरना जारी रखा। वर्ष 2017-18 में यह राजस्व बढ़कर 4453.49 करोड़ रुपये और 2018-19 में 5200 करोड़ रुपये हो गया। सरकार अब इस राजस्व को और अधिक बढ़ाना चाहती है।

शराब को प्रमोट न करे सरकार- विपक्ष

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्टैंडिंग कमेटी के पूर्व चेयरमैन संदीप कपूर ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली सरकार का बजट 2015 के बजट से दो गुने से ज्यादा हो गया है। लेकिन यह केंद्र सरकार की जीएसटी कलेक्शन की रणनीति से हुआ है। जबकि अरविंद केजरीवाल सरकार ने बजट बढ़ाने के लिए कोई नया काम नहीं किया है। सरकार को बजट बढ़ाने के लिए केवल उन्हीं माध्यमों को बढ़ावा देना चाहिए जो समाज को गलत राह पर न ले जाते हों, जबकि शराब से युवाओं को कई तरह का नुकसान होता है। इसलिए सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए शराब को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।

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यहां गड़बड़ हो सकती है

वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में शिक्षा को सबसे ज्यादा 15 हजार 815 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था, जो पूरे बजट का 24.33 फीसदी था। 100 करोड़ रुपये सरकारी स्कूलों की कक्षाओं को डिजिटल रूप में बदलने के लिए निर्धारित किया गया था। 2820 करोड़ रुपये बिजली बिल पर जारी सब्सिडी को जारी रखने के लिए दिया गया था। 2485 नई बसों की खरीद की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए भी फंड निर्धारित किया गया था। सरकार ने कोरोना से लड़ाई के लिए शुरुआती तौर पर 50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था। सरकार के आर्थिक संकट से इन योजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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