इस दौरान देखा जाएगा कि पीएम 2.5 व 10 को नियंत्रित करने में यह टावर कितना प्रभावी साबित होता है। उन्होंने दावा किया कि टावर की अपने आसपास की हवा में मौजूद गंदगी को सोखकर शुद्ध हवा का उत्सर्जन करता है।
पर्यावरण मंत्री के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक फ्लाईओवर के पास की वायु की गुणवत्ता के आंकड़े जुटाए जाएंगे। पूर्व के आंकड़ों से नए आंकड़ों की तुलना के आधार पर पता किया जाएगा कि टावर कितना प्रभावी है।
परिणाम बेहतर रहने पर एसे टावर पूरी दिल्ली में लगाया जाएंगे। इससे दिल्ली की आबोहवा साफ करने में मदद मिलेगी। इमरान हुसैन की मानें तो सरकार वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करने जा रही है। इसी दिशा में पायलेट प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है।