दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने शराब के शौकीनों के लिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था की शुरुआत की है। इस टोकन से बिना लंबी कतार में लगे व्यवस्थित तरीके से शराब खरीदी जा सकेगी। लक्ष्मीनगर विधानसभा से आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नितिन त्यागी ने यह जानकारी दी। बता दें कि केंद्र ने कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में जारी लॉकडाउन के तीसरे चरण में निषिद्ध स्थानों (कंटेनमेंट जोन) को छोड़कर बाकी सभी जोन में शराब की दुकानों को खुलने की अनुमति दी गई है।
शराब के शौकीनों के लिए सरकार ने कुछ नियमों के साथ ठेके तो खोले लेकिन वहां उमड़ी भीड़ ने सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को ठेके बंद करवाने पड़े। वहीं, जहां ठेके खुले भी तो लंबी-लंबी लाइनों की वजह से कईयों की तो जाने की हिम्मत ही नहीं हुई। ऐसे में शराब की ऑनलाइन डिलिवरी या टोकन व्यवस्था शुरू किए जाने की मांग भी हुई थी। बता दें कि दिल्ली में कुल 160 शराब की दुकानें खुली हैं और एक घंटे में दुकान पर 50 व्यक्तियों के लिए ही टोकन जारी किया जाएगा।
दिल्ली सरकार ने इसके लिए एक वेबसाइट क्यूटोकन डॉट इन लॉन्च की है। वेबसाइट पर आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिसके बाद आपको तारीख और समय दिया जाएगा, जिस दौरान आप वहां जाकर बिना लाइन में लगे शराब खरीद सकेंगे। आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नितिन त्यागी ने बताया, 'दिल्ली सरकार ने यह योजना शुरू की है ताकि शराब की दुकानों पर भीड़ न लगे और लॉकडाउन के नियमों का पालन होता रहे।'
ऐसे मिलेगा टोकन
सबसे पहले क्यूटोकन डॉट इन वेबसाइट पर जाएं। यहां मांगी गई सभी जानकारियां भरें और अपने पास की शराब की दुकान का चयन करें। सभी जानकारियां भर कर सबमिट कर दें। आपका टोकन आपको मिल जाएगा जिसमें टाइम स्लॉट और तारीख लिखी होगी साथ ही शराब की दुकान का नाम और आपकी जानकारी होगी। टोकन दिखाते समय एक सरकारी पहचान पत्र भी ले जाना जरूरी होगा जिसकी जानकारी टोकन में दी गई थी।
आर्थिक मंदी के दौर में राजस्व का खेल
कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर के देश मंदी की मार से त्रस्त हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश के हर राज्य से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व केवल शराब बिक्री से हासिल होता है। अधिकतर राज्यों के कुल राजस्व में 15 ले 30 फीसदी राजस्व शराब बिक्री से ही आता है।
साल 2019-20 के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली को शराब की बिक्री से करीब 5,500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, महाराष्ट्र को 24,000 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 11,874 करोड़ रुपये, तेलंगाना को 21,500 करोड़, उत्तर प्रदेश को 26,000 करोड़, कर्नाटक को 20,948 करोड़, पंजाब को 5,600 करोड़ रुपये और राजस्थान को 7,800 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।