963 करोड़ की लागत से अस्पतालों का पुनर्गठन
963 करोड़ रुपये की लागत से राजन बाबू टीबी अस्पताल, आचार्य भिक्षु, दीपचंद बंधु अस्पताल, भगवान महावीर, संजय गांधी, डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर और गुरु गोविंद सिंह अस्पताल के पुनर्गठन को मंजूरी दी है। इनके पुनर्गठन के बाद 2601 नए बिस्तरों की सुविधा भी मिलेगी, वहीं द्वारका में 1241 बिस्तरों के अस्पताल का निर्माण अंतिम चरण में है।
300 करोड़ की दवाएं निशुल्क बांटीं
दिल्ली सरकार ने मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के लिए साल भर में 300 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार के अनुसार हर माह दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 20 लाख रोगियों को निशुल्क दवाएं मिल रही हैं। शिकायत के लिए 1031 हेल्पलाइन जारी किया है।
निजी केंद्रों पर मेडिकल टेस्ट कराने का बजट बढ़ा
एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड टेस्ट निजी केंद्रों पर कराने के लिए संचालित योजना पर खर्च के लिए 49 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। पिछले वर्ष यह 20 करोड़ था। सरकार के अनुसार इस योजना के तहत अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीज निशुल्क जांच करा चुके हैं।
मायूसी : बजट में स्वास्थ्य बीमा जिक्र तक नहीं
प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) को रोककर खुद की नई स्वास्थ्य बीमा योजना लाने का एलान करने के बाद भी दिल्ली सरकार ने 2019-20 के बजट में इसका जिक्र तक नहीं किया। लोगों को उम्मीद थी कि दिल्ली सरकार भी केंद्र की भांति पांच लाख रुपये सालाना स्वास्थ्य बीमा का लाभ देगी। 2018-19 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य बीमा योजना पर दिसंबर 2018 से काम शुरू होने की घोषणा की थी, जोकि अब तक ठंडे बस्ते में पड़ी है। इसके अलावा बजट में की गईं स्वास्थ्य घोषणाएं भी ज्यादातर पिछले वर्ष की हैं, जो अब तक लंबित हैं।