भाजपा ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार का भारी मात्रा में बजट बिना इस्तेमाल किये 'लैप्स' हो जाता है, लेकिन इसके बाद भी वह एमसीडी के स्कूलों के लिए कोई फंड जारी नहीं करती है। आरटीआई के द्वारा मिली जानकारी के आधार पर बीजेपी ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने स्कूलों के लिए फंड तो निर्धारित करती है लेकिन उसका पूरा इस्तेमाल नहीं करती। इसी बीच एमसीडी के स्कूल आर्थिक तंगी झेलते हैं लेकिन राजनीतिक द्वेष के चलते दिल्ली सरकार उनकी कोई मदद नहीं करती।
मनोज तिवारी ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि दिल्ली सरकार ने अपने लगभग 1033 स्कूलों के लिए बजट का 23.5 फीसदी हिस्सा निर्धारित किया था। जबकि इसी दौरान उत्तरी नगर निगम 743 स्कूलों के लिए बजट का महज 1.46 फीसदी हिस्सा दिया गया। बजट आवंटन से भी खराब स्थिति यह है कि 2016-17 में 3500 करोड़ का आवंटन करने के बाद भी केवल 2666 करोड़ रुपये का इस्तेमाल हो सका। बाकी पैसा लैप्स हो गया लेकिन दिल्ली सरकार ने एमसीडी के स्कूलों की कोई मदद नहीं की।
भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि 2017-18 के दौरान 2127 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। लेकिन केवल 1677 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि मौखिक रुप से बजट बढ़ाने का भी मामला सामने आया है। जोन 23 में एक कार्य के लिए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 27.71 करोड़ के बजट को दो गुना से भी ज्यादा मौखिक रुप से बढ़ाकर 59 करोड़ रुपये कर दिया जो कि कानूनन गलत है। उन्होंने कहा कि यह भारी लापरवाही का मामला है और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
छत से गिरा पंखा, सिसोदिया दें जवाब
मनोज तिवारी ने कहा कि मंगलवार को पूर्वी दिल्ली के एक राजकीय नगर निगम के स्कूल में एक छात्र के ऊपर पंखा गिर गया। बच्चे का जीटीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है। तिवारी ने कहा कि यह सीधे तौर पर बच्चों के लिए क्लासरुम बनाए जाने में भ्रष्टाचार को दर्शाता है और मनीष सिसोदिया को इसकी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।