1984 महिपालपुर सिख दंगा मामले में दोषी यशपाल सिंह की अपील पर बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी, लेकिन इस दौरान सरकार की ओर से पेश होने के लिए दिल्ली सरकार व एसआईटी के वकील आपस में भिड़ गए। कोर्ट की फटकार के बाद दोनों शांत हुए। दूसरी ओर फांसी की सजा पाए यशपाल के वकील ने कहा कि उन्हें अब तक पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं, इसलिए वह बहस नहीं कर सकते। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को यशपाल सिंह व एसआईटी की याचिकाओं पर सुनवाई होनी थी। याचिकाओं पर सुनवाई शुरू होते ही दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा व एसआईटी के पूर्व वकील अमन लेखी के बीच बहस होने लगी। राहुल मेहरा ने कहा कि दिल्ली सरकार के वकील वह हैं और वही सरकार की ओर से जिरह करेंगे। दूसरी ओर अमन लेखी का कहना था कि केस की जांच एसआईटी ने की थी और उसके बाद दोषी को सजा मिली, इसलिए वह बहस करेंगे।
खंडपीठ ने दोनों वकीलों को फटकार लगाई। खंडपीठ ने कहा कि इन याचिकाओं में दिल्ली सरकार पक्षकार है। इनसे से अब एसआईटी का कोई लेना-देना नहीं है। एसआईटी ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया और उसके बाद केस की सुनवाई पूरी हो चुकी है, इसलिए एसआईटी की भूमिका समाप्त हो चुकी है। अब कोर्ट के समक्ष दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ही जिरह करेंगे। अगर जरूरत होगी तो अमन लेखी कोर्ट की सहायता कर सकते हैं।