दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को नगर निकायों और डीडीए से पूछा कि उन्होंने अधिक खतरे वाली इमारतों की पहचान करने और नोटिस देने के बाद भूकंपीय स्थिरता की आवश्यकता पर क्या कदम उठाए हैं। इसके साथ ही पीठ ने दिलली सरकार से भी इस संबंध में किए प्रयासों के बारे में जानकारी मांगी है।
मुख्य न्यायाधीश न्यूयमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने नगर निगमों और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से कहा कि वे भूकंपीय स्थिरता की आवश्यकता वाली इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी करने के बाद उठाए गए कदमों से संबंध में रिपोर्ट पेश करें। पीठ ने प्राधिकारियों से कहा कि इस विषय पर काम करने में प्रगति लाएं। पीठ इस याचिका पर अगली सुनवाई 31 अगस्त को करेगी।
वहीं पीठ ने दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया और यह बताने के लिए कहा कि पिछले साल अप्रैल में जारी अधिसूचना के अनुरूप क्या राष्ट्रीय राजधानी में इमारतों की भूकंपीय स्थिरता के मामले को देखने के लिए कोई विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। पीठ ने यह निर्देश याचिकाकर्ता वकील अर्पित भार्गव की ओर से दायर याचिका पर दिए हैं।
इस याचिका में उन्होंने दिल्ली में इमारतों को मजबूत करने के लिए कार्ययोजना का समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी समिति गठित करने का आग्रह किया गया है। याचिका में कहा गया कि 12 अप्रैल से तीन जुलाई के बीच राष्ट्रीय राजधानी में 14 बार भूकंप आ चुका है।
भार्गव ने यह भी कहा कि क्योंकि केंद्र ने अपने द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में कोई उत्तर या शपथपत्र दायर नहीं किया है, इसलिए विज्ञान भवन और शास्त्री भवन तथा इस तरह की अन्य इमारतों के बारे में यह स्पष्टता नहीं है कि वे भूकंपीय दृष्टिकोण से मजबूत हैं या नहीं। वहीं नगर निगमों ने शपथपत्र दायर कर कहा कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली इमारतों की स्थिरता का आकलन करने के लिए 144 अवसंरचना अभियंताओं को काम पर लगाया है।