बाइक चलाने या पीछे बैठी महिलाओं के हेलमेट पहनने को अनिवार्य करने के फैसले को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई। जिस तरह से पिछले करीब 20 साल से हेलमेट को लेकर कई बार फैसले बदले गए, उससे साफ है कि राजधानी में महिलाओं को हेलमेट पहनाना आसान नहीं है।
इसका सबसे अधिक विरोध अकाली दल और सिख संगठन कर रहे हैं। दिल्ली मोटर वाहन अधिनियम में बाइक चलाने और पीछे बैठने वाले को हेलमेट पहनना अनिवार्य था। इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट में वर्ष 1994 में पहली जनहित याचिका दायर हुई थी। अदालत ने दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग को तय कानून का पालन करवाने का निर्देश दिया।
अदालत के आदेश पर जब अमल शुरू हुआ तो प्रदर्शन और धरनों की झड़ी लग गई। सिख समुदाय का तर्क था कि उनके धर्म में सिर पर पगड़ी के अलावा टोपी या हेलमेट पहनना स्वीकार्य नहीं है। तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के हस्तक्षेप से अधिनियम में संशोधन कर पगड़ीधारी सिख के अलावा महिलाओं को हेलमेट से छूट दे दी गई।
इसके बाद हाईकोर्ट में समय-समय पर याचिकाएं दायर हुईं। अदालत ने कई बार फैसले दिए, लेकिन हर बार सरकार ने महिलाओं को छूट बरकरार रखी। वर्ष 2012 में सामाजिक फिल्म निर्माता उल्लास ने सुरक्षा के मुद्दे पर याचिका दायर कर की।
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उनका तर्क था कि हर साल 60 से 70 महिलाएं हेलमेट न पहनने के कारण सिर पर चोट लगने से दम तोड़ रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से लिंगभेद व धर्म के आधार पर किसी को भी छूट प्रदान नहीं की जा सकती।
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रवैया अपनाया तो दिल्ली सरकार ने 25 अप्रैल 2012 को कहा कि महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट संबंधी नियम को खत्म कर मोटर वाहन अधिनियम के रूल 115 में संशोधन किया जाएगा।
इस संशोधन के बाद बाइक के पीछे बैठे हर व्यक्ति, चाहे वह महिला हो या पुरुष, उसे हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। सरकार दिल्ली मोटर वाहन रूल में किए संशोधन को रद्द करती, इससे पहले ही सिख समुदाय का विरोध शुरू हो गया।
सरकार ने यू-टर्न लेते हुए तय किया कि महिलाओं पर निर्भर है कि वे हेलमेट पहनें या नहीं, क्योंकि कुछ समुदाय के लिए यह मुद्दा काफी संवेदनशील है। सरकार ने कहा कि वह महिलाओं को जागरूक करेगी कि जान के खतरे को देखते हुए वे स्वेच्छा से हेलमेट पहनें।
हाईकोर्ट ने भी सरकार के फैसले को मंजूर कर लिया था। अब सिख संगठनों ने फिर से विरोध के सुर उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे साफ जाहिर है कि सरकार को निर्णय पर अमल करवाना आसान नहीं है।