दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल) ने थाइलैंड से डिपोर्ट किए गए गैंगस्टर हरसिमरन उर्फ बादल उर्फ सिमरन को आईजीआई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। ये जनवरी में फर्जी पासपोर्ट पर भारत से फरार हो गया था। आरोपी पहले भी जबरन वसूली, हत्या, हत्या की कोशिश और आम्र्स एक्ट के 23 मामलों में शामिल रहा है। प्रकोष्ठ के पुलिस उपायुक्त अमित कौशिक ने बताया कि वह गोल्डी ढिल्लों के साथ इंटरनेशनल गैंगस्टर बनने और यूएस/यूरोप से काम करने की प्लानिंग कर रहा था।
उपायुक्त ने बताया कि विशेष प्रकोष्ठ ने नवंबर, 2024 में उजागर सिंह, जिला मैनपुरी, यूपी निवासी महेंद्र सिंह उर्फ सतेंद्र सिंह को गैर-कानूनी हथियार और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया था। प्रकोष्ठ में उसके खिलाफ 20 नवंबर, 2024 में आर्म्स का मामला दर्ज किया गया था। आरोपी महेंद्र सिंह 2010 से थाना छावला, दिल्ली में हत्या के केस में फरार था। आरोपी महेंद्र सिंह ने बताया कि ज़ब्त किए गए हथियार हरसिमरन से लिए गए थे। यह भी पता चला कि आरोपी हरसिमरन शातिर गैंगस्टर है और 23 केस में शामिल है। जमानत पर रिहा होने के बाद 14 केस में ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों को जांच में पता लगा कि वह मुलजिम हरसिमरन राजेश सिंह पुत्र विनोद सिंह निवासी गोरखपुर, यूपी के नाम से नकली पहचान पर पासपोर्ट बनवाया और जनवरी, 2025 में इसी पासपोर्ट पर लखनऊ से बैंकॉक गया था। उसने वहां से अपने केस के गवाह को कोर्ट के सामने मुकरने और प्रोटेक्शन मनी के तौर पर 50 लाख रुपये देने की धमकी दी थी। इसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था।उसे बैंकाक पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उसे 26 नवंबर 2025 को भारत वापस भेज दिया गया। जब हरसिमरन दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा तो उसे पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे इंस्पेक्टर संजय गुप्ता व पंकज की टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
कुश्ती शुरू की थी
दिल्ली के शालीमार बाग के रहने वाले हरविंदर सिंह ने बचपन में ही दिल्ली के अलग-अलग अखाड़ों में जाकर कुश्ती शुरू कर दी थी। कुश्ती की ट्रेनिंग लेने के लिए वह कोल्हापुर, महाराष्ट्र भी गया था। यहां ये अखाड़े में सिकंदर के संपर्क में आया। उसने हार्डकोर क्रिमिनल समुंदर से संपर्क किया। ये बदमाश बुराड़ी, दिल्ली में सक्रिय था और उसे 10 साल की कड़ी कैद की सजा हुई थी। हरसिमरन भी मनोज नाम के एक हार्डकोर क्रिमिनल और विजय उर्फ नॉटी नाम के एक बीसी के साथ शामिल हो गया। ये सागरपुर इलाके में सक्रिय था।
हरसिमरन ने अपना गैंग बनाया
हरसिमरन ने गैंग बनाकर नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली इलाके में लोकल लेवल पर एक्सटॉर्शन शुरू कर दिया। उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और नॉर्थ दिल्ली में कई जघन्य मामलों में शामिल रहा। जब कोई पीडि़त पैसे देने से मना करता था तो वह और उसके साथी पीडि़त को धमकाने, पीटने या उस पर या उसके ठिकानों पर गोलियां चलाने से भी नहीं हिचकिचाते थे। 2005 से आरोपी हरसिमरन पर जबरन वसूली, हत्या की कोशिश, हत्या और आर्म्स एक्ट के 23 केस दर्ज हैं।
जेल में गैंगस्टरों के संपर्क में आया
यूरोप में बैठा गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों ने उसे दुबई आने को कहा और भरोसा दिलाया कि उसे यूएसए भेजा जाएगा और वहां से अपना गैंग ऑपरेट करेंगे। कुछ समय बैंकॉक में रहने के बाद वह यूएसए जाने के लिए दुबई चला गया। दुबई पहुंचने के बाद, गोल्डी ढिल्लों के निर्देश पर, वह दुबई में स्थित एक कबूतरबाज से मिला। उसे अजरबैजान भेजा गया, जहां से उसने अमेरिका के लिए उड़ान भरने की कोशिश की। लेकिन कागजातों में कमी के कारण उसे वापस दुबई वापस भेज दिया गया। इसके बाद गोल्डी ढिल्लों ने उसे यूरोप आने के लिए कहा। जब वह बेलारूस सीमा के माध्यम से यूरोप में प्रवेश करने की कोशिश की तो बैंकॉक में, सेंट्रल एजेंसियों के साथ लोकल अधिकारियों की सक्रिय और दिल्ली पुलिस के दिए गए डोजियर से उसे बैंकॉक में हिरासत में लिया गया था।