क्या आप ने सुना है कि सजा के लिए अपराधी को जहां रखा जाए, सजा पूरी होने तक उसे इस जगह से इतना लगाव हो जाए कि वह उसे छोड़ने के लिए तैयार ही न हो?
दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक चलती बस में नर्सिंग की एक छात्रा के साथ हुई दरिदंगी को भला कौन भूल पाएगा। इस जघन्य अपराध में एक नाबालिग भी दोषी था जो फिलहाल बाल सुधार गृह में अपनी सजा पूरी कर छह महीने से भी कम समय में बाहर आने वाला है।
लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि 18 साल की उम्र मे अपराध करने वाला वह लड़का जो अब 20 साल का हो चुका वह आजाद होना ही नहीं चाहता। सुधार गृह में बिताये गए पिछले ढाई सालों ने उसे पूरी तरह बदल दिया है।
अब वह पांच टाइम की नमाज अता करता है और रोजे भी रखता है। इतना ही नहीं, इफ्तार के लिए बनने वाले खाने के लिए वह पूरे जी-जान से तैयारी करता है।
रिहाई से उसे लग रहा डर!
पूर्वी दिल्ली के 'मजनूं का टिला' में बने सुधार गृह की देखरेख करने वाले जनकल्याण अधिकारी और काउंसलर का कहना है कि वह सुधार गृह में रहने वाले सभी बंदियों में सबसे ज्यादा अनुशासन में रहने वाला शख्स है।
रमजान से वह इतना प्रभावित है कि उसने दाढ़ी बढ़ा ली है और पांच टाइम की नियमित नमाज पढ़ने लगा है। लेकिन जैसे-जैसे उसकी रिहाई का वक्त नजदीक आ रहा है उसे डर लग रहा है।
असल में उसे डर है कि उसने जो गुनाह किये हैं उसके लिए समाज शायद उसे माफ न करे और बाहर की दुनिया ही उसके लिए सजा न बन जाए।
रोजेदारों की फरमाइशें करता है पूरी
इस डर ने उसे इतना जकड़ रखा है कि अब वह सुधार गृह की दुनिया से बाहर आना ही नहीं चाहता। हालांकि सुधार गृह के वेलफेयर अधिकारी और काउंसलर का कहना है कि सुधार गृह का असली मकसद है कि यहां रहने के दौरान बाल अपराधी की मानसिकता को बदला जा सके और उसे एक बेहतर इंसान बनाया जा सके।
सुधार गृह में आने के बाद से उसने खाना बनाने को अपनी हॉबी बना ली है। शाम के समय दूसरो कैदियों के लिए इफ्तार की तैयारी भी वही करता है। दिलचस्प बात ये है कि वो उन सभी के नाम और उनके खाने का ख्याल भी रखता है।
सुधार गृह में रहने वाले 50 कैदियो में से 20 कैदी ऐसै हैं जो रोजा रखते हैं। इन सबके खान-पान का वह पूरा खयाल रखता है और उनके लिए पकवान बनाने वाली टीम को लीड वही करता है। रोजा रखने वाले बंदी अपने खाने के लिए फरमाईशें भी उसी से करते हैं।
अपराध के बाद हो गया था बिल्कुल खामोश
घटना के बाद जब वह इस सुधार गृह में आया तो किसी से बातचीत करना पंसद नही करता था। उसे एक कमरे में अकेले रखा गया था, लेकिन एक साल बितने के साथ ही उसे अपना कमरा सुधार गृह के एक अन्य आरोपी जो दिल्ली हाईकोर्ट ब्लास्ट में पकड़ा गया के साथ शेयर करना पड़ा।
यहां आकर उसने अपना नाम लिखना भी सीखा। खाना बनाने का उसे जुनून है। खाने के अलावा उसे पेन्टिंग और सिलाई का भी शौक है। बता दें कि यह वही नाबालिग है जो 16 दिसंबर को दिल्ली में हुए निर्भया गैंग रेप का आरोपी है।
उस घटना के चार आरोपी मृत्यु दंड की मांग का शिकार है जिनमें से एक ने तिहाड़ जेल में खुद ही फांसी लगा ली थी। और इसे नाबालिग होने के कारण तीन साल के लिए बाल सुधार गृह में रहने की सजा हुई थी।
हालांकि अब इसी सुधार गृह के वेलफेयर अधिकारी का कहना है अब इसे देखकर कोई यह कह ही नहीं सकता कि यह इतने जघन्य अपराध का आरोपी था।