साइबर सेल अधिकारियों ने बताया कि चीनी नागरिकों के इस गिरोह में कई ऐसे भारतीय काम कर रहे हैं जो कभी चीनी आकाओं से नहीं मिले और न ही उन्हें जानते हैं। बस उनके लिए काम कर रहे थे। इन लोगों ने ही ठगी के लिए भारतीयों को गिरोह में भर्ती किया था। आरोपी रॉबिन ने पूछताछ के दौरान बताया वो लोग इन एप के जरिए टेक्नोलॉजी के नाम पर रुपए कमाने का लालच लोगों को दे रहे थे। जो कोई इस एप को जॉइन करता तो उसे ऑड मेंबर्स बनाने का लालच दिया जाता था। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें।
शुरू में ये 10 फीसदी मुनाफा देते थे-
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये कम से कम 300 रुपये इंवेस्ट कराते थे और दोगुना करने का झांसा देते थे। ज्यादा से ज्यादा रकम की कोई सीमा नहीं थी। शुरू में ये पीड़ित को 10 फीसदी मुनाफा देते थे। कुछ को ये प्रत्येक दिन का मुनाफा देते थे तो कुछ को ये 24 दिन में दोगुना रकम करने का झांसा देते थे। कुछ दिन तो ये पैसा देते थे उसके बाद ये गायब हो जाते थे। आरोपी ऐसे पैस डालते थे कि केवल मोबाइल एप्लीकेशन में ही नजर आते थे एकाउंट में नहीं।
टेलीग्राम के जरिए संपर्क करता था-
रॉबिन चीनी नागरिकों से टेलीग्राफ के जरिए संपर्क में रहता था। उमाकांत, वेदचंद्रा, हरीओम और अभिषेक दिल्ली के रहने वाले हैं। ये सभी शेल कंपनीज के यहीं डायरेक्टर थे। इन्होंने अपने परिजनों को भी कंपनियों में पदाधिकारी बना रखा था। वहीं आरोपी शशि बंसल और मिथलेश शर्मा ने बोगस कंपनियां और बैंक अकाउंट चीनी जालसाजों को मुहैया करवाए थे। आरोपी सीए अवकि ने पुलिस को बताया वे शेल कंपनीज अपने फैमिली मेंबर, दोस्त और एम्पलॉइज के नाम पर खोलते, जिन्हें वे चाइनीज नागरिकों को दो से तीन लाख में एक कंपनी को बेच देते। उसने चीनी नागरिकों के लिए 110 शेल कंपनियां बनाई थीं। कपंनियों में कुछ डमी डायरेक्टर भी बना रखे थे।