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दिल्लीः यमुना की बाढ़ ने दिए दर्दनाक जख्म, पहले घर उजड़ा, फिर छिन गया बेटा

Sat, 24 Aug 2019 12:10 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : विवेक निगम
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दिल्ली की गीता कालोनी इलाके में प्रशासन की लापरवाही से एक बच्चे की सर्पदंश से मौत हो गई। गीता कालोनी शमशान घाट के पास बाढ़ राहत शिविर में शुक्रवार रात अंधेरे में जमीन पर सो रहे 12 साल के बच्चे को सांप ने डंस लिया। 

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उसे तुरंत डॉ. हेडगेवार अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार तड़के उसने दम तोड़ दिया। मृतक की शिनाख्त दीपक (12) के रूप में हुई है। परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही और अस्पताल प्रशासन पर ठीक से इलाज नहीं करने के आरोप लगाए हैं। 

परिजनों का आरोप है कि वेंटिलेटर के अभाव में बच्चे ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सब्जी मंडी मोर्चरी भेज दिया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
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पुलिस के मुताबिक दीपक अपने परिवार के साथ गीता कालोनी, यमुना खादर में रहता था। इसके परिवार में पिता लक्ष्मण, मां सरिता और एक छह साल का छोटा भाई सुशील है। दीपक के पिता यमुना खादर में किसानों के पास मजदूरी करते हैं। 

परिवार ने खादर में ही झुग्गी बनाई हुई थी। दिल्ली में बाढ़ का खतरा मंडराया तो दिल्ली सरकार ने खादर में रहने वालों के लिए पुश्ते किनारे सड़क पर राहत शिविर के लिए टेंट की व्यवस्था कर दी। 

रविवार रात को दीपक अपने परिवार के साथ गीता कालोनी शमशान घाट के पास बनाए गए राहत शिविर में आ गया था। शुक्रवार रात करीब 8.30 बजे वह अपने परिवार से सोने जाने की बात कर अपने टेंट में चला गया। वहां पर जमीन पर पड़ी मेट पर जाकर वह लेट गया।

इसी दौरान सांप ने उसके पैर में डंस लिया। अंधेरे में जब उसे तेज दर्द हुआ तो उसने माता-पिता को इसकी जानकारी दी। फौरन परिजनों ने उसकी टांग में कसकर कपड़ा बांध दिया। इस बीच पास में मौजूद सिविल डिफेंस कर्मियों को इसकी जानकारी दी गई। 

बाद में पास में मौजूद डॉक्टर ने उसे फौरन अस्पताल ले जाने के लिए कहा। दीपक का शरीर भी नीला पड़ने लगा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने फौरन उसे अंबू बैग लगाकर सिविल डिफेंसकर्मी को चलाने के लिए कहा। डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल में वेंटिलेटर मौजूद नही है। इस दौरान तड़के 5.00 बजे दीपक ने दम तोड़ दिया। 

राहत शिविर में जमीन पर सोने की व्यवस्था...

दीपक के पिता लक्ष्मण ने प्रशासन पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि प्रशासन ने राहत शिविर में बस टेंट लगाकर जमीन पर मेट बिछा दी है। वहां रहने वाले लोगों के लिए चारपाई या सोने के लिए कोई और इंतजाम नही किए हैं। 

यमुना में जब पानी आता है तो वहां के कीड़े-सांप-बिच्छू निकलकर किनारे की ओर भागते हैं। लक्ष्मण के मुताबिक जिस समय दीपक को सांप ने डंसा था, उस समय टेंट में अंधेरा भी था। 

दिल्ली सरकार ने भले ही टेंट में लाइट का इंतजाम किया हुआ हो, लेकिन वहां रोजाना लाइट देर से आती है। हादसे की सूचना मिलने के बाद पूर्व दिल्ली नगर निगम स्थायी समिति के चेयरमैन संदीप कपूर वहां पहुंचे। उन्होंने दिल्ली सरकार से वहां पूरे समय बिजली की व्यवस्था करने और चारपाई का इंतजाम करने की मांग की।

नहीं पहुंचे वाइल्ड लाइफ वाले सांप पकडने...

हादसे के बाद राहत शिविर के आसपास शनिवार सुबह कई बार काले रंग का कोबरा देखा गया। सिविल डिफेंस कर्मियों व प्रशासन की ओर से कई बार वाइल्ड लाइफ वालों को सांप पकड़ने के लिए कॉल की गई। लेकिन बार-बार कॉल करने के बाद भी कोई नही आया। 

उनका कहना था कि सांप की मोबाइल से क्लिप बनाकर भेजो, उसके बाद ही वह मौके पर पहुंचेंगे। इसकेे अलावा यदि सांप किनारे पर होगा तो ही वह आएंगे। जंगल से सांप नही पकड़ा जाएगा। 

हादसे के बाद राहत शिविर में रहने वाले लोग खासे दहशत में हैं। उनका कहना है कि जब तक सांप पकड़ा नही जाएगा तब तक वह वहां नही सोएंगे।
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दिल्ली सरकार ने लगाए हैं 2700 से अधिक टेंट

दिल्ली में बाढ़ का खतरा मंडराते ही यमुना खादर में रहने वाले लोगों के लिए दिल्ली सरकार की ओर से 2700 से अधिक टेंट की व्यवस्था की गई है। दावा किया गया है कि यहां खाने, पानी, टेंट, बिजली, सिविल डिफेंस, डॉक्टरों की व्यवस्था की गई है। खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन कार्यों को देखने का दावा करते हैं। शिविर में रह रहे लोगों का आरोप है कि यहां प्रशासन की ओर से गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। 
 
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