जगह कम होने की वजह से सुनीता से उसका बैग ऑटो में पीछे रखने को कहा गया। फिर ऑटो कुछ दूर ही चली थी कि वसुंधरा के पास अचानक से रुकी। ड्राइवर ने कहा कि ऑटो में कुछ खराबी है। ये सुनकर सुनीता भी उसकी मदद के लिए उतरी।
कुछ मिनटों के बाद ऑटो की पिछली सीट पर बैठे एक यात्री ने सुनीता को उसका बैग दिया और दूसरा ऑटो पकड़ कर जाने के लिए कहा। सुनीता वहीं रोड के किनारे खड़ी हो गई और दूसरे ऑटो का इंतजार करने लगी। कुछ ही देर बाद उस ऑटो के ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की और बिना सुनीता को बैठने के लिए कहे तेजी से वहां से भाग गया।
सुनीता ने बताया कि वह इन सब बातों से हैरान थी। वो बोली, 'मैंने अपना बैग चेक किया तो पाया कि उसमें से वो पैकेट गायब था जिसमें 30000 रुपये नकद पड़े हुए थे। मैंने वहां से जा रही एक अन्य गाड़ी की मदद से उस ऑटोरिक्शा का पीछा करने की कोशिश की, लेकिन वो लोग सड़क की दूसरी लेन का इस्तेमाल करते हुए फरार हो चुके थे।'
सुनीता के ऑटो पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी बैठ चुकी हैं
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बाद में सुनीता ने पुलिस को फोन किया जिन्होंने उसे खाना और किराया देकर खिड़की एक्सटेंशन स्थित उसके घर के लिए रवाना किया। उसकी शिकायत के आधार पर साहिबाबाद पुलिस स्टेशन ने आईपीसी की धारा 379(चोरी) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि इलाके में इस तरह की घटना कोई नई नहीं है लेकिन इस बार इसमें कोई हिंसा नहीं हुई।
पुलिस ने बताया कि पिछले केसों में ऑटो गैंग हिंसा भी करते थे जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि इस बार कोई हिंसा नहीं हुई है जिससे ऐसा अंदाजा है कि ये कोई नया गैंग है।
वहीं सुनीता ने बताया कि मैंने अपनी सारी सेविंग बैंक में जमा करा दी थी और दिल्ली आने से पहले इसे निकाला था। मेरे पास कमर्शियल लाइसेंस है और मैं सोच रही थी कि 10000 रुपए देकर नया परमिट लूंगी और बाद में एक ऑटोरिक्शा ले लूंगी। अब मेरे पास 300 रुपये प्रतिदिन के किराए पर ऑटो लेकर चलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इन दिनों किराए पर ऑटो लेना काफी मुश्किल होता है। सुनीता पिछले 15 साल से ऑटो चलाने का काम कर रही हैं।