18 में से 14 एक्सपेंशन जॉइंट लगाए जा चुके
सरकार के मुताबिक फ्लाईओवर शुरू होने के बाद इस रास्ते का करीब 65 से 70 फीसदी ट्रैफिक सीधे एलिवेटेड कॉरिडोर से गुजरेगा। इससे नीचे की सड़क पर केवल स्थानीय यातायात रहेगा और करावल नगर, घोंडा, बृजपुरी, यमुना विहार और भजनपुरा इलाके में रोज लगने वाले जाम में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। साथ ही गोकुलपुरी से खजूरी खास होते हुए सिग्नेचर ब्रिज तक काफी हद तक सिग्नल फ्री सफर संभव होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक अब तक 220.10 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 80 डेक स्लैब में से 74 तैयार हो चुके हैं, जबकि केवल छह का काम बाकी है। 5600 रनिंग मीटर क्रैश बैरियर में से 4100 मीटर बन चुके हैं और 18 में से 14 एक्सपेंशन जॉइंट लगाए जा चुके हैं।
2023 में अटका था काम, अब फिर आई रफ्तार
सरकार ने बताया कि साल 2023 में जरूरी अनुमति नहीं मिलने से परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई थी। अब सभी मंजूरियां मिलने के बाद डीएमआरसी ने शेष फ्लाईओवर, रैंप और अन्य काम को तेजी से पूरा करना शुरू कर दिया है। अंतिम चरण में सड़क की ऊपरी परत, बिजली के 100 पोल, क्रैश बैरियर और एंटी कार्बोनेशन पेंटिंग का काम किया जाएगा।
फ्लाईओवर के साथ आधुनिक सुविधाएं भी
आएगा बड़ा बदलाव
करीब 1.40 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में फ्लाईओवर के साथ मेट्रो संरचना, दोनों ओर तीन-तीन लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर, नई सड़कें, फुटपाथ, ड्रेनेज, बिजली, रोड साइनेज और वर्षा जल संचयन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। पीडब्ल्यूडी और डीएमआरसी की यह साझा परियोजना उत्तर पूर्वी दिल्ली की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली मानी जा रही है।