पुलिसकर्मियों द्वारा पेलेट गन या कील लगी लाठियों के इस्तेमाल के दावे भी गलत साबित हुए। पुलिस और सीजेपी के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारियों ने नीट के मुद्दे पर संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया है। दिल्ली पुलिस पर क्रूरता के आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों के कई वीडियो सामने आए थे। पुलिस के अनुसार, सोमवार से प्रसारित कई दावे झूठे, भ्रामक या पुराने पाए गए। पुलिस ने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इनका खंडन जारी किया है।
फर्जी ऑडियो क्लिप की जांच
जांचकर्ता एक वायरल ऑडियो क्लिप की भी जांच कर रहे हैं। इसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आवाज कथित तौर पर बदली गई थी। अधिकारी की शांति बनाए रखने की मूल अपील को पाकिस्तान-आधारित हैंडलर ने बदल दिया था। उन्होंने इसमें मनगढ़ंत ऑडियो डाला था। पुलिस ने इस क्लिप को पूरी तरह फर्जी बताया है और इसका खंडन किया है।
दिल्ली पुलिस की फैक्ट चेक टीम कर रही जांच
दिल्ली पुलिस ने एक फैक्ट-चेक टीम बनाई है। यह टीम विरोध प्रदर्शन से संबंधित हर वायरल वीडियो, तस्वीर और ऑडियो क्लिप की जांच कर रही है। टीम हर वीडियो के स्रोत की पुष्टि करती है और डिजिटल फुटप्रिंट्स का विश्लेषण करती है। पुलिसकर्मी पर हमलों, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान दिखाने वाले वीडियो का भी विश्लेषण हो रहा है। इन वीडियो का सीसीटीवी फुटेज और एआई-आधारित कैमरा इनपुट से मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि जानबूझकर गलत जानकारी बनाने, बदलने या प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।